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शीतकाल में दुर्लभ वन्य जीवों के शिकार को रोकने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगेंगे ऑटोमेटिक कैमरे

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Wildlife Management in Pithauragarh
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दीपक कापड़ी
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पिथौरागढ़। शीतकाल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार रोकने के लिए वन विभाग दारमा, व्यास, चौदास और मिलम घाटी में सोलर ऊर्जा से संचालित स्वचालित कैमरे लगाने जा रहा है। इन कैमरों की मदद से शिकारियों पर निगरानी रखी जाएगी। इन कैमरों से दुर्लभ वन्यजीवों को भी ट्रैप किया जाएगा।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शीतकाल में शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। ये शिकारी जंगलों में आग लगाकर पहले दुर्लभ वन्यजीवों को जंगल से बाहर निकालते हैं और फिर उनकी हत्या कर वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करते हैं। वन विभाग ने इस बार दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार रोकने के लिए सोलर ऊर्जा से संचालित स्वचालित कैमरे लगाने का निर्णय लिया है।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र दारमा, व्यास, चौदास, मिलम, छिपलाकोट, छिपलाकेदार, हंसलिंग, नागिनीधूरा में करीब 40 से अधिक कैमरे लगाए जाएंगे। वन्यजीव अपराध रोकने के लिए विभाग गश्ती दल का भी गठन करेगा, जो प्रत्येक दिन उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गश्त कर वन्यजीव संबंधी अपराधों को रोकेगा।
आईटीबीपी की मदद भी लेगा वन विभाग
पिथौरागढ़। शीतकाल में बर्फबारी के कारण रास्ते बंद होने से वन विभाग को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गश्त करने में दिक्कत होती है। इसको देखते हुए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ वन्यजीवों के शिकार को रोकने के लिए विभाग आईटीबीपी की मदद भी लेगा।
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ये जीव पाए जाते हैं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में
भूरा भालू, कस्तूरी मृग, मोनाल, तिब्बती भेड़िया, रेड फॉक्स, आइबेक्स, हिमालयी तहर, गोल्डन ईगल, ग्रिफ्फान वल्चर आदि
शीतकाल में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाने के लिए इस बार सोलर ऊर्जा से संचालित 40 कैमरे लगाए जाएंगे। वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाने के लिए आईटीबीपी की मदद भी ली जाएगी। - डॉ. विनय भार्गव, डीएफओ, पिथौरागढ़।
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