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आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दुश्वारियां नहीं हुईं कम

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निर्माणाधील-ऐलागाड़ जुम्मा सड़क का निरीक्षण करते पीएमजीएसवाई के ईई। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दुश्वारियां कम होने की नाम नहीं ले रही हैं। आपदा में पेयजल योजनाओं और पैदल रास्तों के ध्वस्त होने से लोग कई किमी पैदल चलकर गांवों तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं। पीएमजीएसवाई की 10.5 किमी लंबी निर्माणाधीन ऐलागाड़-जुम्मा सड़क कई स्थानों पर ध्वस्त हो गई है। लोग पैदल चलकर गांव पहुंच रहे हैं। भारी बारिश के कारण चीन सीमा को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपूलेख और सोबला दर तिदांग सड़क के बंद होने से सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी परेशान हैं।
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बीआरओ की टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय सड़क के जगह-जगह बंद होने से पीएमजीएसवाई को ऐलागाड़-जुम्मा सड़क को खोलने में दिक्कत हो रही थी। टनकपुर-तवाघाट सड़क के खुलने के बाद पीएमजीएसवाई ने पोकलैंड और जेसीबी को मौके पर भेजकर सड़क खोलने का कार्य शुरू कर दिया है। पीएमजीएसवाई के ईई ने सड़क का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि एक सप्ताह में सड़क खोल दी जाएगी।
बंगापानी-घरुड़ी सड़क पैदल मार्ग के जगह-जगह ध्वस्त होने से लोगों को गांव तक खाद्यान्न और रोजमर्रा का सामान पहुंचाने में दिक्कत हो रही है। तवाघाट-लिपूलेख और सोबला-दर तिंदाग सड़क के बंद होने से सीमांत के लोगों के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियां भी परेशान हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लोग कई किमी पैदल चलकर अग्रिम पोस्टों तक पहुंच रहे हैं।
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जर्जर ट्रॉली से आवाजाही कर रहे टांगा के लोग
बंगापानी(पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील के आपदा प्रभावित टांगा गांव तक पहुंचने में ग्रामीणों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गांव को जोड़ने वाली एकमात्र ट्राली जर्जर हाल में है, जबकि दूसरा रास्ता नदी किनारे से होकर जाता है। तेज बारिश में नदी के उफान पर होने पर ग्रामीणों को जल स्तर घटने का इंतजार करना पड़ता है। आपदा से हर साल क्षतिग्रस्त होने वाली ट्रॉली से भी नदी पार करने में हर समय खतरा बना रहता है।
ध्वस्त पेयजल योजनाओं को बरसाती स्रोतों से जोड़ा
नाचनी (पिथौरागढ़)। भारी बारिश के कारण क्षेत्र में 50 प्रतिशत पेयजल योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। बारिश से भैसकोट, गटघोरगाड़ी, नाचनी, राया, बजेता, धामीगांव, कोट्यूड़ा, हुपुलि, रांथी, गिरगांव सहित कई अन्य गांवों में पेयजल योजनाएं ध्वस्त हो गई थीं। विभाग ने इन पेयजल योजनाओं को बरसाती पेयजल स्रोतों से जोड़ा है। एक माह बाद ये स्रोत सूख जाएंगे। इसके बाद इन क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा जाएगा। जल निगम के ईई मदन पुरी का कहना है कि इन पेयजल योजना ठीक करने के लिए आपदा मद और हर घर जल पार्ट-2 के तहत बनाया जाएगा। अभी अस्थायी व्यवस्था की गई है।
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