धारचूला (पिथौरागढ़)। 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सैनिकों के पराक्रम को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दिल्ली के शहीद स्मारक से शुरू हुई स्वर्णिम विजय मशाल सीमांत धारचूला पहुंची। धारचूला कुमाऊं स्काउट में पहुंचीं मशाल का ऑनरेरी कैप्टन दीवान सिंह और उप कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर युद्ध वीरों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया।
बुधवार को स्वर्णिम विजय मशाल को कुमाऊं स्काउट के ऑडिटोरियम में रखा गया। इसके बाद कार्यक्रम का शुुभारंभ मुख्य अतिथि बीआरओ के कमांडर एनके शर्मा ने किया। वन आर्चर के कर्नल उमेश्वर और उप कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रदीप सिंह ने आठ पूर्व सैनिकों और दो वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया। उप कमान अधिकारी प्रदीप सिंह ने कहा कि यह यात्रा देश के प्रत्येक नागरिकों को प्रेरित करने वाली है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए मेजर मुकेश बिष्ट ने 1971 के युद्ध की जानकारी लोगों को दी। कार्यक्रम में सूबेदार मेजर लक्ष्मण सिंह, नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट, एनएचपीसी के महाप्रबंधक प्रीतपाल सिंह, एसएसबी के इंस्पेक्टर कश्मीर सिंह, मुकेश जोशी, हवलदार होशियार सिंह सहित सेना के अन्य अधिकारी मौजूद थे।
इन वीरों को किया गया सम्मानित
ऑनरेरी कैप्टन दीवान सिंह, सूबेदार राम जोशी, हवलदार भीम बहादुर गुरुंग, हवलदार सिंह, उमेश सिंह, नैन सिंह, सिपाही दान सिंह, वीरांगना जीवंती देवी, मनसती देवी को सम्मानित किया गया।
स्वर्णिम विजय मशाल लेकर आए जवानों को सौंपी शहीदों के गांवों की मिट्टी
धारचूला। देश की आन बान और शान के लिए मर मिटने वाले अमर सपूतों के गांवों की मिट्टी स्वर्णिम विजय मशाल लेकर सीमांत धारचूला पहुंचे सेना के जवानों को सौंपी गई। धारचूला तहसील से सिर्खा, ग्वालगांव, रकोट बलुवाकोट, ठेका बलुवाकोट, जगोड़ा जौलजीबी और गलाती गांवों के वीर जवानों के गांव की मिट्टी कुमाऊं स्काउट के उपकमान अधिकारी ले. कर्नल प्रदीप सिंह ने विजय मशाल को लेकर पहुंची टीम को सौंपी। यह मिट्टी शहीद स्मारक दिल्ली में रखी जाएगी। यात्रा में साथ चल रहे 6 गढ़वाल रेजिमेंट के जेसीओ दलीप सिंह ने बताया कि यह मशाल यात्रा देश के चारों दिशाओं में दिल्ली से निकाली गई है, जिसका समापन भारत-पाक युद्ध के 50 वर्ष पूरा होने पर 16 दिसंबर 2021 को दिल्ली वार मेमोरियल पर किया जाएगा।
गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं स्वयं को : उमेद सिंह
धारचूला। 1965 और 71 की लड़ाई में भाग लेने वाले धारचूला के बलुवाकोट निवासी सेवानिवृत्त हवलदार उमेद सिंह ने बताया कि 1965 के युद्ध में भारतीय सेना सियालकोट तक पहुंच गई थी। अगर उस समय सरकार की ओर से युद्ध विराम का निर्देश नहीं मिलता तो आज पाकिस्तान हमारे कब्जे में होता। उमेद सिंह ने कहा कि स्वर्णिम विजय मशाल के दौरान जो सम्मान सेना की ओर से उन्हें मिला हैस इससे वह स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।