फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh News: कैलाश मानसरोवर का अंतिम दल भारत लौटा, आज चौकोड़ी होगा रवाना

Sun, 23 Aug 2026 11:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
धारचूला (पिथौरागढ़)। कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर अंतिम और 10वां दल रविवार को भारत लौट आया। दल के सभी यात्री स्वस्थ हैं। शाम को यात्रियों के आधार शिविर धारचूला पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। दल सोमवार सुबह चौकोड़ी के लिए रवाना हो जाएगा। कैलाश मानसरोवर के अंतिम दल में शामिल 28 पुरुष और 16 महिला यात्रियों ने रविवार सुबह 9.20 मिनट पर भारत-चीन सीमा पर लिपुलेख दर्रा क्रॉस कर भारतीय सीमा में प्रवेश किया। चीनी अधिकारियों ने दल को आईटीबीपी अधिकारियों के संरक्षण में दिया। इसके बाद यात्री नाभीढांग, कालापानी, गुंजी होते हुए सड़क के रास्ते धारचूला के लिए रवाना हुआ। शाम करीब साढ़े पांच बजे अंतिम दल के यात्री धारचूला पहुंचे। जहां दल का यात्रा अधिकारी धन सिंह बिष्ट और सहायक यात्रा अधिकारी रमेश सिंह बिष्ट के नेतृत्व में यात्रियों को बुरांश का जूस पिलाकर स्वागत किया गया। यात्री रविवार को आधार शिविर में विश्राम के बाद सोमवार सुबह बेड़ीनाग में चौकोड़ी के लिए रवाना होंगे।
विज्ञापन




दस दलों में 477 यात्रियों ने की यात्रा

यात्रा अधिकारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि कुल 10 दलों में 477 यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर की यात्री की। इसमें 323 पुरुष और 154 महिला यात्री शामिल रहीं। यात्रा के दौरान एक यात्री तथा दल के साथ शामिल केएमवीएन के एक कुक का निधन हो गया।

जयपुर के अग्रवाल दंपती ने यात्रा को बताया अद्भुत

धारचूला। जयपुर निवासी दंपती आलोक कुमार 68 वर्ष और रागिनी अग्रवाल 65 वर्ष पहली बार यात्रा में आए। उन्होंने यात्रा को अद्भुत बताया और इसे सफल बनाने में सहयोग करने के लिए केएमवीएन कर्मचारियों, आईटीबीपी, सेना और बीआरओ का आभार प्रकट किया।
विज्ञापन


एमपी के गौरव और आरती ने की झील के किनारे पूजा अर्चना

धारचूला। दसवें दल में शामिल और पहली बार आए मध्य प्रदेश के ठीकरी जिला बड़वानी निवासी गौरव महाजन और आरती महाजन ने यात्रा को आत्मा को सुकून देने वाला बताया। कहा कि भोलेनाथ की कृपा होगी तो दोबारा यात्रा पर आएंगे। बताया कि उन्होंने मानसरोवर झील के किनारे पूजा अर्चना की। गौरी कुंड, कैलाश पर्वत के दर्शन से मन प्रसन्न हो गया। कहा कि भारत के अंतिम सीमा तक बीआरओ के सड़क सुविधा पहुंचाने से यात्रा काफी सुगम हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें