पिथौरागढ़। देवभूमि के नजारों से आकर्षित होकर आदि कैलाश और ऊं पर्वत के दर्शनार्थ आए कई पर्यटक बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश के कारण जगह-जगह फंस गए। इन विपरीत हालातों में स्थानीय प्रशासन, आईटीबीपी और एसएसबी के जवानों ने इन लोगों का खासा ख्याल रखा। बृहस्पतिवार को राहत-बचाव कर जब इन पर्यटकों को इन क्षेत्रों से निकाला गया तो उनका कहना था कि आपदा की घड़ी में देवभूमि के असल देवों ने उनकी रक्षा की और आज उन्हें सुरक्षित घर भेजा जा रहा है।
ऊं पर्वत और आदि कैलाश दर्शन के लिए विभिन्न राज्यों से आए पर्यटक मूसलाधार बारिश के चलते गुंजी, दांतु, दुग्तू समेत कई स्थानों में फंस गए। एसएसबी और आईटीबीपी ने 17 अक्तूबर को तेज बारिश के चलते उन्हें आगे जाने से रोक दिया। सभी यात्रियों का प्रशासन, एसएसबी और आईटीबीपी ने चार दिन तक यात्रियों को पूरा ध्यान रखा। सभी पर्यटक इंतजामों से बेहद खुश नजर आए। हालांकि पर्यटकों को ऊं पर्वत के दर्शन नहीं कर पाने का मलाल है। उन्होंने विपरीत हालातों में सहायता करने के लिए सभी लोगों का आभार जताया है।
केस 01 : समय-समय पर हाल जानने आए लोग
पिथौरागढ़। झांसी के डॉ. प्रकाश गुप्ता, पत्नी सीता गुप्ता और बेटी सृष्टि के साथ ऊं पर्वत और कैलाश दर्शन के लिए 17 अक्तूबर गुंजी पहुंचे थे। उन्होंने बताया 17 अक्तूबर को गुंजी पहुंचते ही शाम सात बजे से तेज बारिश शुरू हो गई। नजदीक में होम स्टे में सभी व्यवस्था हो गई थी। प्रशासन, आईटीबीपी, एसएसबी समय-समय पर उनका हाल जानने के लिए आ रही थी। किसी तरह परिजनों से बात करवाई गई। बेटी सृष्टि का जेईईई का ऑनलाइन फार्म भी सेना ने गुंजी में भरवाया। सबने इतना सहयोग किया कि लगा नहीं आपदा के बीच फंसे हैं। आगे सड़क खुलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में वह पिथौरागढ़ जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊं पर्वत के दर्शन नहीं करने का मलाल है लेकिन अगली बार वह दर्शन केे लिए जरूर आएंगे।
केस 02 : प्रशासन ने की रहने की व्यवस्था
पिथौरागढ़। ऊं पर्वत और आदि कैलाश दर्शन के लिए कोलकाता से 11 सदस्यीय दल आया था। गुंजी क्षेत्र में फंसी कोलकाता निवासी कोहेली मुखर्जी ने बताया कि वह 16 अक्तूबर को धारचूला से नाबी पहुंचे। आदि कैलाश के दर्शन करने के बाद ऊं पर्वत दर्शन के लिए निकले। खराब मौसम के चलते 18 अक्तूबर तक वे वहीं रुके। 19 अक्तूबर को वे सभी लोग गुंजी आ गए। दल में 68 साल से अधिक उम्र के लोग भी शामिल थे। खराब मौसम के कारण वह लोग बेहद परेशान थे। ऐसे में 20 अक्तूबर को उन्होंने एसडीएम से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद उनके रहने की व्यवस्था की गई। उन्होंने सभी व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन का आभार जताया। दल में अधिवक्ता कल्याण मुखर्जी, पत्नी इंदिरा मुखर्जी, कस्तूरी मुखर्जी, शिखा चटर्जी, नीलेश कुंडू, जया कूंडू, सपना, मौरी, शुभम, रमाकांत मिश्रा शामिल थे।
पहली बार देखा ऐसे हालात
पिथौरागढ़। कोहेली ने बताया वे उत्तराखंड घूमने हमेशा आते हैं। मगर पहली बार इतनी बारिश देखी। संचार सेवा बदहाल होने से उनका संपर्क अन्य लोगों से कट गया था। उम्मीद भी नहीं थी कि कैसे वापस पहुंचेंगे। दल में बीमार इंदिरा मुखर्जी भी थी। जो दो बार कैंसर जैसी बीमारी से लड़ाई जीत चुकी थीं। नाबी होम स्टे की सनम नबियाल की सराहना की। पर्यटकों ने बताया सनम ने उन्हें किसी भी प्रकार की चिंता नहीं करने की अपील की। बेफिक्र होकर यहां पर रहें। पैसों की चिंता न करें। मुसीबत में पर्यटकों की मदद करना उनका फर्ज है। संवाद