चंपावत के क्वैराला तालाब में डूबे छात्र का शव निकालते एसडीआरफ कर्मचारी।
चंपावत। क्वैराला ताल में दोस्तों के साथ नहाने गए पुनाबे गांव के छात्र की डूबकर मौत हो गई है। उसकी मौत से घर में कोहराम मचा है। क्षेत्र में मौज मस्ती के लिए गए लोग भी सदमे में है।
रविवार को जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर क्वैराला ताल में धीरज तड़ागी (15) पुत्र लक्ष्मण सिंह अपने दोस्तों के साथ क्वैराला ताल में नहाने आया था। वह ताल में नहा रहा था। इस दौरान अचानक ताल में तैरते हुए वह डूब गया। जब कुछ देर तक वह ऊपर नहीं आया तो उसके साथियों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि वह डूब गया। इसके बाद वहां अफरा तफरी को माहौल हो गया। वहां काफी लोग मौजूद थे, लेकिन कुशल तैराक नहीं होने के कारण किसी ने उसे बचाने की हिम्मत नहीं जुटाई। इसके बाद दूनिया गांव के तैराक राहुल कुमार को किसी ने करीब दो से ढाई बजे के बीच फोन पर छात्र के डूबने की जानकारी दी। वह अपने भाई सूरज के साथ कुछ ही मिनट में मौके पर पहुंच गया। उसने और उसके भाई ने करीब आधे घंटे तक उसे ताल में काफी खोजा, लेकिन उसका पता नहीं चला।
इस दौरान पुलिस और एसडीआरएफ को भी इसकी सूचना दे दी गई थी। कोतवाल पीएस नेगी के नेतृत्व में पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। एसडीआरएफ के तैराकों ने काफी देर तक उसे खोजा, लेकिन वह नहीं मिला। फिर ताल के चारों और एंगल डाले गए। इसमें छात्र का शरीर फंस गया। तब जाकर उसे रेस्क्यू किया गया। उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने पंचनामा भर पोस्टमार्टम की कार्रवाई की। उसकी मौत की खबर से पुनाबे गांव में परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
मिलनसार था धीरजचंपावत। दूनिया गांव निवासी तैराक राहुल कुमार ने बताया कि धीरज बहुत ही मिलनसार था। वह पहले भी कई बार ताल में नहाने आया। जब भी मुझसे मिलता था। तब कहता था टार्जन भाई कैसे हो। रविवार को भी छात्र धीरज राहुल को रास्ते में ताल की तरफ जाते हुए मिला। हर बार की तरह उसने राहुल का अभिवादन टार्जन भाई कहकर किया। इसके बाद राहुल अपने घर खाने चला गया। खाने के बाद वह आराम करने की तैयारी में था। तभी फोन पर उसे छात्र के डूबने की सूचना मिली तो वह भागकर उसकी जान बचाने पहुंच गया। पहुंचकर पता चला की उसे डूब आधा घंटा हो गया है। उसने अपने भाई के साथ ताल में उसे ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। राहुल को अफसोस है कि वह उसे नहीं बचा पाया। दूनिया गांव का राहुल और अन्य लोग दिन भर ताल के आसपास रहते हैं। अगर कोई ताल में डूबता है तो उसे तुरंत ही बचा लेते हैं। कई लोगों को वह और अन्य ग्रामीण कई बार डूबने से बचा चुके हैं।