1955 में पिथौरागढ़ से नेपाल सीमा पर स्थित झूलाघाट कस्बे तक सड़क बनी तो कई छोटी नदियों में पुलों का निर्माण भी किया गया। नेपाल सीमा से जोड़ने वाली इस लाइफ लाइन में हुड़कना का मोटर पुल अब बेहद जर्जर हालत में पहुंच गया है। पुल को बनाते समय ही तकनीकी खामियां रह गई थी। इसके दोनों ओर तीखे ढलान छोड़ दिए गए। हुड़कना पुल के पास से वाहनों के फिसलने का क्रम अक्सर बना रहता है।
यह सड़क लोनिवि के अधीन है। पिछले वर्ष एडीबी की मद से सड़क चौड़ीकरण और हॉटमिक्स तो किया गया, लेकिन किसी ने भी पुलों की तरफ पलटकर नहीं देखा, यदि कभी यह पुल ध्वस्त होता है तो झूलाघाट, गौरीहाट, वड्डा, मूनाकोट, माजिरकांडा, अड़किनी, जाखपंत के लिए वाहनों की आवाजाही ठप हो जाएगी। लोनिवि के पास पुल की मरम्मत न होने के संबंध में कोई जवाब नहीं है। या तो विभाग ने जर्जर पुल का कोई सर्वे नहीं किया है या फिर विभाग के अधिकारी किसी हादसे के इंतजार में हैं। हुड़कना का यह पुल छोटी सी नदी के ऊपर बनाया गया है। घाट चौड़ा होने के कारण यहां पर पुल बनाना जरूरी था। पुल के दोनों ओर की दीवारें धंसने लगी हैं। पुल पर 60 वर्ष पूर्व डाला गया सीमेंट उखड़ने लगा है। कम स्पान का होने के बावजूद पुल छोटे वाहनों के चलने में ही हिलने लगता है। पुल के पास पाला गिरता है। वहां पर कभी कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया।