स्व. सूबेदार हरिदत्त जोशी(फाइल)
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मूनाकोट (पिथौरागढ़)। बर्तियाकोट (बिबुल) निवासी सूबेदार हरि दत्त जोशी को मृत्यु के 30 साल बाद ईएमई रिकॉर्ड ऑफिस से प्रतिष्ठा और बहादुरी का प्रतीक रक्षा पदक मिला है। सैनिक पुनर्वास कल्याण के पत्राचार के बाद 20 जुलाई को उनके छोटे बेटे पुष्कर चंद्र जोशी को टनकपुर (बिचई) में यह पदक दिया गया।
स्व. जोशी (जेसी नंबर 84979) वर्ष 1958 में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्होंने देश के लिए 1962, 1965 और वर्ष 1971 के युद्धों में अपनी बहादुरी दिखाई थी। वर्ष 1990 में टनकपुर में उनका निधन हो गया। उनका छोटा बेटा पुष्कर टनकपुर में, बड़ा बेटा डॉ. ललित मोहन जोशी एडिलेड ऑस्ट्रेलिया और बेटी गीता जोशी गंगोलीहाट में रहतीं हैं।
बहादुरी का यह पदक मिलने पर परिजनों ने सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अगर जीवित रहते हरि दत्त को रक्षा पदक मिला होता तो और अधिक खुशी मिलती। परिवारीजनों ने कहा कि वीर कभी नहीं मरते बल्कि वे देशवासियों के दिलों में रहते हैं। उनके तीन भाइयों शंकर दत्त जोशी, हीराबल्लभ जोशी, भुवन चंद्र जोशी ने भी पदक को परिवार के लिए गर्व का विषय बताया है।
रक्षा पदक।- फोटो : PITHORAGARH