18 साल बाद भी आगे नहीं सरकी सड़क की फायल
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पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट में प्रथम गांव तक विकास को पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार चिटगाल गांव के लिए वर्ष 2006 में स्वीकृत चार किमी सड़क तक को 18 साल बाद भी नहीं बना पाई। इस कारण ग्रामीणों को घर तक सिलिंडर पहुंचाने के लिए 1600 से 1800 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
डीडीहाट विकासखंड के चिटगाल गांव को सड़क से जोड़ने के लिए मार्च 2006 में एससीपी (स्पेशल कंपोनेंट प्लान) के तहत चार किमी सड़क की स्वीकृति मिली थी। गोबराड़ी से चिटगाल तक की इस सड़क के लिए बाकायदा 93 लाख से अधिक की राशि की प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल गई थी।
चिटगाल गांव के सामाजिक कार्यकर्ता कुंदन सिंह ने बताया कि गांव के लोगों को सड़क न बनने से आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा हैं। गाड़ी मुवानी और गोबराड़ी तक सिलिंडर लाती है। उसके बाद चार किमी पैदल सिलिंडर लाने और ले जाने की मजदूरी 600 से 800 रुपये देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण में जो आपत्तियां आ रहीं थीं उन्हें दूर करके लोनिवि को अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है। बावजूद इसके अब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं किया जा सका है।
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लोनिवि के ईई अमनदीप राणा ने बताया कि 2006 में स्वीकृत इस सड़क में कई आपत्तियां लग रही थीं। इस कारण सड़क का निर्माण नहीं किया जा सका। मई 2024 में ग्रामीणों ने इस सड़क के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया है। शीघ्र ही लोनिवि की तकनीकी टीम को इस सड़क के निर्माण के लिए गांव भेजा जाएगा।
बीमार को अस्पताल पहुंचाना चुनौती से कम नहीं
चिटगाल गांव के कुंदन सिंह बताते हैं कि अगर गांव में रात के समय कोई बीमार हो जाए तो उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती साबित हो जाता है। पहले उसे डोली से चार किमी पैदल गोबराड़ी तक पहुंचाया जाता है। उसके बाद निजी वाहन बुक कर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। रात में वाहन स्वामी चार से पांच हजार रुपये किराया मांगते हैं।