धारचूला (पिथौरागढ़)। क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बीच हुए भूस्खलन से चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क तीन स्थानों पर बंद हो गई है। इसके चलते करीब 50 आदि कैलाश यात्री और दारमा, व्यास, चौंदास घाटी को जाने वाले ग्रामीण फंसे रहे। धारचूला से आदि कैलाश को जाने वाले यात्रियों को तीन-चार घंटे के इंतजार के बाद वापस लौटना पड़ा।
रविवार की रात क्षेत्र में भारी बारिश हुई। इससे टनकपुर-तवाघाट-लिपुलेख सड़क घटखोला, दोबाट, एलागाड़ पावर हाउस और रौंगती नाले के पास बंद हो गई। हिलवेज कंपनी के प्रबंधक त्रिलोक सिंह दानू ने बताया कि घटखोला के पास सड़क खोल दी गई है। दोबाट में लगातार पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। पत्थर गिरने से यहां कार्य करने में जोखिम बना हुआ है। एलागाड़ पावर हाउस के पास भी भारी संख्या में बोल्डर गिरे हुए हैं। बताया कि दोबाट में मंगलवार सड़क खुलने की उम्मीद है।
सामाजिक कार्यकर्ता नाइस ह्यांकी ने बताया कि सड़क बंद होने से आदि कैलाश के दर्शन कर वापस लौट रहे यात्रियों और ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। धारचूला से आदि कैलाश यात्रियों को लेकर जा रहे वाहन चालक शेखर सिंह ने बताया कि सोमवार को करीब चार घंटे तक सड़क खुलने का इंतजार किया। उसके बाद यात्रियों को लेकर वापस धारचूला लौट आया। यात्रा मार्ग बंद होने से यात्रियों और ग्रामीणों में भी नाराजगी है। क्षेत्र में हुई भारी बारिश के चलते काली नदी का जल स्तर भी बढ़ गया है। काली नदी चेतावनी स्तर 889 मीटर से कुछ ही नीचे 888.80 मीटर पर बह रही है। इसका खतरे का स्तर 890 मीटर पर है।
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मानसून सीजन में बना है खतरा
धारचूला। हिलवेज कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर सुमित सिंह ने बताया कि मानसून काल में संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन से शाम सात बजे बाद सड़क पर कार्य नहीं करने की अनुमति के लिए पत्र भेजा है। संवाद
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जाराजिबली सड़क कई स्थानों पर बंद
पिथौरागढ़। बंगापानी तहसील में हुई भारी बारिश से जाराजिबली में पीएमजीएसवाई की 19 किमी सड़क कई जगहों पर मलबा आने से बंद हो गई है। वाहनों का संचालन बंद होने से लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान संजीव बिष्ट ने बताया कि मानसून काल में सड़क खोलने के लिए जेसीबी की मांग की थी। शासन की लापरवाही से आज तक जेसीबी की व्यवस्था नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि सड़क बंद होने की सूचना पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को दी गई है।
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मानसून काल में सड़क बाधित नहीं हो इसके लिए विभाग ने निविदा निकाली थी। ठेकेदारों का पिछला भुगतान नहीं होने के कारण इस बार निविदा प्रकिया में किसी ने प्रतिभाग नहीं किया। इससे मानसून काल में सड़क बंद होने वाले स्थानों पर मशीनों की कमी हुई है। बंद सड़कों को खोलने के लिए ठेकेदारों से अनुरोध कर मशीन भेजी गई है। - शिवम रावत, ईई पीएमजीएसवाई धारचूला
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कहां कितनी बारिश
बंगापानी 95 एमएम
तेजम 90 एमएम
धारचूला 72,
मुनस्यारी 44.5
थल 57 एमएम
डीडीहाट 24 एमएम
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ऐसी सड़कों से कैसे सुरक्षित घर पहुंचेंगे ग्रामीण
पिथौरागढ़। एक ओर सरकार गांवों से पलायन रोकने के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देने की बात करती है। सड़कों के सुधार के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पिथौरागढ़ जिले के सीमांत के गांवों में सड़कों की स्थिति यह है कि इनमें वाहन तो दूर जानवर तक ठीक से नहीं चल पाते हैं। मुनस्यारी के तल्ला जोहार के तहसील तेजम डोर से सेंणराथी, खेत मोटर मार्ग की यह हालत विकास के दावों की हकीकत बयां करने के लिए पर्याप्त है। अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसी सड़कों पर वाहनों से लोग सुरक्षित घर कैसे पहुंचेंगे।
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पूर्णागिरि मार्ग बाटना गाड़ में करीब 19 घंटे रहा बंद
पहाड़ और क्षेत्र में बारिश से रविवार रात 8:30 बजे आया मलबा, पूर्णागिरि क्षेत्र में 21 घंटे गुल रही बिजली
दोनों ओर लोगों को आने जाने में आती रही दिक्कत, श्रद्धालु मलबे के ऊपर से पैदल निकलते रहे
दो जेसीबी मशीन दिन भर मलबा हटाने में जुटी, सोमवार दोपहर बाद 3:40 बजे खुला मार्ग
संवाद न्यूज एजेंसी
टनकपुर/बनबसा (चंपावत)। पहाड़ और क्षेत्र में रुक-रुककर मानसूनी बारिश से नदी नालों के उफनाने का क्रम जारी है। बाटना गाड़ के पास भारी मलबा आने से पूर्णागिरि मार्ग 19 घंटे बंद रहा। सोमवार दोपहर बाद मार्ग खुला, लेकिन अभी भी हल्का मलबा आने का क्रम जारी है। तहसीलदार जगदीश गिरि ने बताया कि दो जेसीबी को निरंतर मलबा हटाकर यातायात सुचारु कराने के लिए लगाया गया है। पिछले पांच-छह दिन से पूर्णागिरि मार्ग पर बाटना गाड़ और किरौड़ा नाला उफनाने से यातायात कई बाद ठप हो चुका है। राजस्व और लोनिवि की टीम को दोनों जगहों पर तैनात किया गया है। पहाड़ और क्षेत्र में बारिश होते ही किसी भी समय नदी नाले उफना रहे हैं। पूर्णागिरि क्षेत्र में बिजली का पोल गिरने से 21 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही। तहसीलदार गिरि ने बताया कि रविवार की रात में पहाड़ में भारी बारिश से बाटनागाड़ में भारी मलबा आ गया। इससे पूर्णागिरि मार्ग रात करीब 8.30 बजे से बंद करना पड़ा। सुबह से दो जेसीबी मशीनों से मलबा हटाने का कार्य शुरु किया गया। इस बीच तहसीलदार के साथ मां पूर्णागिरि मंदिर कमेटी के अध्यक्ष किशन तिवारी, लोनिवि के एई लक्ष्मण सिंह सामंत ने मलबा हटाने के कार्य का जायजा लिया।
दोपहर बाद करीब 3.40 बजे मलबा कुछ हटने पर मार्ग खुल सका। इस बीच मां पूर्णागिरि के दर्शन को जाने वाले यात्री मलबे के ऊपर से होकर गुजरते रहे। तहसीलदार गिरि स्वयं श्रद्धालुओं को बारिश को देखते हुए सचेत रहने के प्रति जागरूक करते रहे। बताया कि पहाड़ में जैसे जैसे बारिश हो रही है। बाटना गाड़ में पानी के साथ मलबा आ रहा है्। दो जेसीबी मलबा हटा रहे हैं।
बनबसा में शारदा नदी का जलस्तर सायं छह बजे साठ हजार क्यूसेक से अधिक पहुंच गया। यह इस वर्ष में अब तक का सर्वाधिक जलस्तर है। सोमवार सुबह आठ बजे शारदा नदी का जलस्तर 13118 क्यूसेक था। दोपहर 12 बजे नदी का जलस्तर बढ़कर 29795 और दोपहर बाद तीन बजे 57950 क्यूसेक पहुंच गया। सायं छह बजे नदी का जलस्तर 61670 क्यूसेक पहुंच गया। यूपी सिंचाई विभाग के एसडीओ प्रशांत कुमार ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। एक लाख क्यूसेक पहुंचने पर बैराज से वाहनों का आवागमन बंद कर दिया जाएगा। संवाद
जल भराव को लेकर व्यापारियों ने दिया ज्ञापन
चंपावत। व्यापार संघ ने जल भराव की समस्या के समाधान की मांग को लेकर कैंप कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। व्यापारियों ने कहा कि नगर क्षेत्र और राष्ट्रीय राजमार्ग में जगह-जगह गड्ढे बने हैं और नालियां भी बंद पड़ी हैं। इससे सड़क पर जल भराव हो रहा है। जल भराव से लोग परेशान हैं। ज्ञापन देने वालों में व्यापार संघ अध्यक्ष विकास शाह, अमर नाथ सग्टा, हरीश सग्टा, कमल दीप, लक्ष्मण सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
बेड़ूमहर में भूस्खलन से दो मकानों को खतरा
नाचनी (पिथौरागढ़)। भारी बारिश के चलते रविवार की रात क्षेत्र के बेडूमहर गांव के दान सिंह मेहता और गोकर्ण सिंह दानू के घरों के आंगन में भूस्खलन हो गया। भूस्खलन से मकान खतरे की जद में आ गए हैं।
प्रभावितों ने तेजम तहसील आपदा केंद्र में सूचना दर्ज कराई है। लोनिवि के अवर अभियंता कृष्णा पिपलिया ने बताया हरड़िया के नया बस्ती में पहाड़ी से मलबा आने से थल-मुनस्यारी सड़क 10 घंटे बंद रही। सड़क को सोमवार आठ बजे यातायात के लिए खोला गया। होकरा-नामिक क्षेत्र में हुई भारी बारिश से रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया है। पिछले वर्ष हरड़िया का मलबा रामगंगा में पट गया था। इससे वहां झील बन गई थी जो रामगंगा के तेज बहाव में खुल गई है। संवाद