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सबसे तगड़ी चुनौती से पार पाने की छटपटाहट में कांग्रेस

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चंपावत में मंत्रणा करते कांग्रेस के वरिष्ठ नेता। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत (चंद्रशेखर जोशी)। दो-तिहाई बहुमत वाली भाजपा की मौजूदा सरकार के मुखिया का मुकाबला करने उतरी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। विधानसभा के पांच चुनाव में चंपावत सीट पर दो बार काबिज रहने वाली कांग्रेस को पांच साल में दो लगातार हार का सामना करना पड़ा है।
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इस साल फरवरी में टिकट के तीन आवेदकों सहित 15 से अधिक वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने भाजपा का थाम लिया है। कांग्रेस के पास संसाधनों की भी कमी है। यहां तक कि उसने नामांकन के बाद रैली, जुलूस, सभा तक नहीं की। इसके पीछे उसने सादगी की दलील दी है लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस वक्त सूबे के सबसे कठिन इम्तिहान से गुजर रही कांग्रेस इस लड़ाई को सम्मानजनक टक्कर देने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए महंगाई, बेरोजगारी सहित भाजपा के पिछले कार्यकाल की कमियों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
कांग्रेस के लिए पांच चुनौतियां
-लगातार दो चुनाव हारने से गिरा मनोबल
-बड़े पैमाने पर हो रहा दलबदल
-पार्टी में अलग-अलग धड़े
-बूथ प्रबंधन के लिए सक्षम टीम जुटाना
-मुख्यमंत्री के बड़े कद की तोड़ निकालना।
महत्वपूर्ण होगी यशपाल आर्या की भूमिका
चंपावत। कांग्रेस की इस मुश्किल घड़ी से पार पाने में विपक्ष के नेता यशपाल आर्या की भूमिका खासी अहम हो सकती है। इसकी कई वजहें भी हैं। यशपाल आर्या साढ़े चार साल तक भाजपा सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे हैं। पिछले साल उन्होंने कांग्रेस में घर वापसी की। दो बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहने के अलावा उत्तराखंड के पांचों विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले यशपाल न केवल पार्टी के सबसे बड़े दलित चेहरे हैं, बल्कि खटीमा सीट के विधायक के रूप में उनका टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के लोगों से पुराने रिश्ते और साख है। खुद यशपाल का कहना है कि टनकपुर-बनबसा क्षेत्र के लोगों से उनका पुराना व्यक्तिगत वास्ता है।
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कांग्रेस ने बनाए आठ सेक्टर
चंपावत। उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है। इसके लिए चंपावत क्षेत्र को आठ सेक्टर में बांटा गया है।
जिलाध्यक्ष पूरन सिंह कठायत की अध्यक्षता और प्रदेश प्रवक्ता डॉ. महेश ढेक के संचालन में हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि बूथों को सशक्त करने के साथ भाजपा की जनविरोधी नीतियों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल ने बताया कि चाराल, सिप्टी, तल्लापाल, तामली, सूखीढांग, अमोड़ी, टनकपुर, बनबसा सेक्टर बनाए गए हैं। बूथ इकाइयों को भी मुस्तैद किया जा रहा है। बैठक में रुद्रपुर नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष मीना शर्मा, महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अल्का पाल, मोनिका, सरोज रानी, रेखा सोनकर, विद्या यादव, नीरज वर्मा, निर्मल तड़ागी, विमला मेहरा, खीमानंद बिनवाल, उमेश खर्कवाल आदि थे।
किस चुनाव में कितने प्रत्याशी
चुनावी वर्ष प्रत्याशी
2002 14
2007 11
2012 12
2017 04
2022 07
2022 (उपचुनाव) 5
कांग्रेस कमजोर नहीं, दलबदल करने वाले मौकापरस्त: करन
चंपावत। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि दलबदल के बावजूद कांग्रेस कमजोर नहीं है। दलबदल करने वाले मौकापरस्त है, उनकी जनता की बीच कोई स्वीकार्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महंगाई, खनन की लूट और बेरोजगारी पर भाजपा को घेरेगी।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पार्टी प्रत्याशी को मजबूत बताते हुए कहा कि महिला को टिकट देकर महिला सम्मान और महिला मुद्दों पर जोर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पहाड़ के युवाओं के लिए रोजगार का सबसे बड़ा सहारा बनने वाली फौज की भर्ती नहीं किया जाना मुख्य चुनावी मुद्दे हैं। माहरा ने कहा कि अच्छी संभावना के बावजूद संगठन की शक्ति का जमीनी स्तर पर कुशलता से उपयोग न कर पाने से कांग्रेस को विधानसभा के आम चुनाव में कामयाबी नहीं मिली। इससे सीख लेते हुए पार्टी आगे बेहतर प्रदर्शन करेगी।
‘एक क्षेत्र से दो जिम्मेदारी किसी की उपेक्षा नहीं’
चंपावत। करन माहरा ने कहा कि कुमाऊं से संगठन का मुखिया और विपक्ष का नेता बनाया जाना किसी एक क्षेत्र को बढ़ावा देना या किसी क्षेत्र की उपेक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जरूरत के हिसाब से मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी प्रदेश अध्यक्ष या विपक्ष के ये दोनों शीर्ष पद एक ही क्षेत्र से पहले भी आते रहे हैं।
हरिद्वार कुंभ क्षेत्र यूपी को देना आस्था से खिलवाड़ : कापड़ी
चंपावत। विधानसभा में कांग्रेस के उप नेता भुवन कापड़ी ने कहा कि हरिद्वार के जिस कुंभ क्षेत्र पर उत्तराखंड का स्वामित्व था, उसे भी परिसंपत्तियों के बंटवारे में उत्तर प्रदेश को दिया गया है। यह न केवल आस्था से खिलवाड़ है, बल्कि अब उत्तराखंड को इसके लिए उप्र की अनुमति लेनी होगी।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा चंपावत उपचुनाव में सत्ता का दुरुपयोग और आचार संहिता का उल्लंघन कर रही है। आचार संहिता लगने से कुछ वक्त पूर्व चहेते अधिकारियों के तबादले इसकी ओर इशारा करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खटीमा के विकास के दावों को हवाई बताया। कहा कि सीएम ने खटीमा में अतिक्रमण हटाने में दोहरा रवैया अपनाया। अमीरों और चहेतों के अतिक्रमणों की अनदेखी कर इसकी गाज सिर्फ गरीबों और विरोधियों पर चलाई गई। कापड़ी ने कहा कि भाजपा सरकार जब पांच साल में देहरादून, हरिद्वार, काशीपुर, रुड़की, हल्द्वानी जैसे बड़े शहरों को स्मार्ट सिटी नहीं बना सकी, तो ऐसे में चंपावत क्षेत्र को स्मार्ट सिटी बनाने का नारा चुनावी लाभ लेने का शिगूफा है। मुख्यमंत्री पर हमला करते हुए कापड़ी ने कहा कि सीएम को गोरखनाथ दरबार, गोल्ज्यू सहित कई धार्मिक स्थल चुनाव लड़ने के वक्त याद आ रहे हैं।
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