पिथौरागढ़। सर्दी का मौसम शुरू होते ही जिले भर के अस्पतालों में खांसी-जुकाम, बुखार के साथ निमोनिया का खतरा बढ़ने लगा है। जिला और महिला अस्पताल में आए दिन इस तरह के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसमें सर्वाधिक संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है।
मौसम परिवर्तन के कारण जिला महिला अस्पताल में एक माह से कम आयु के करीब तीन से चार बच्चे निमोनिया से ग्रसित आ रहे हैं। जिला अस्पताल में एक माह से ज्यादा उम्र के करीब एक साल से 10 साल के तीन से चार बच्चे रोज उपचार के लिए आ रहे हैं। जिले के प्राइवेट अस्पतालों में निमोनिया, सर्दी, जुकाम, खांसी से ग्रसित कई बच्चे आ रहे हैं। बुजुर्ग लोग भी निमोनिया की शिकायत के बाद अस्पताल उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि नवजात और छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि निमोनिया और अन्य रोगों से बचाव के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन, पानी से धोना चाहिए। खांसते, छींकते समय मुंह पर हाथ रखें। इसके लिए इस्तेमाल किए गए टिशू को तुरंत निस्तारित करें। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं। पर्याप्त आराम करें। संतुलित आहार लें और नियमित तौर पर व्यायाम करें। छोटे बच्चों को ठंड से बचाएं। शीतकाल में नियमित धूप सेकनी चाहिए।
निमोनिया के लक्षण
बच्चों की श्वास तेज चलना।
श्वास लेते समय घरघराहट की आवाज आना।
खांसी-बुखार के साथ पसलियों का चलना।
वयस्कों में श्वास लेते और खांसते समय सीने में दर्द।
पसीना आना, ठंड लगना, बलगम के साथ खांसी।
निमोनिया से बचाव
बच्चे-वयस्क निमोनिया से पीड़ित हैं तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
घरेलू उपचार में काढ़ा और भाप का सेवन आराम दे सकता है।
खानपान में गर्म चीजों को शामिल करना चाहिए।
शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
सर्दी लगे तो गर्म कपड़े पहनना ही ठीक होगा।
कक्ष में पंखा-कूलर है तो उसे बंद रखें।