पिथौरागढ़। केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए सहकारिता विभाग की समितियों के माध्यम से जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं। यह केंद्र खुलने से मरीजों को ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते दामों पर दवाइयां उपलब्ध हो जातीं लेकिन दिक्कत यह है कि इन केंद्रों के संचालन के लिए फार्मासिस्ट ही नहीं मिल रहे हैं।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने की कवायद कर रही है। सहकारिता विभाग के एआर सीएस पांगती ने बताया कि विण, देवलथल, डीडीहाट, लोहाथल (कोटमन्या) और सातशिलिंग समितियों में जन औषधि केंद्र खोलने के लिए रजिस्ट्रेशन कर दिया है। बावजूद इसके यह केंद्र संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इसमें दिक्कत यह आ रही है कि औषधि केंद्रों के संचालन के लिए कोई भी फार्मासिस्ट तैयार नहीं हो रहा है।
दरअसल इन केंद्रों को प्राॅफिट शेयरिंग (लाभ) में शुरू किया जाना है। सातशिलिंग केंद्र को चलाने के लिए विभाग को एक एम. फार्मा डिग्री धारी युवक तो मिला लेकिन उसने भी 15,000 रुपये महीने का मानदेय देने की मांग उठाई। लाभ में हिस्सा देने की शर्त पर कोई भी फार्मासिस्ट तैयार नहीं है। साथ ही केंद्रों का किराया भी देना है। यह केंद्र कितना लाभ उठा पाएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसके चलते केंद्र खुल नहीं पा रहे हैं। पांगती ने बताया कि आठ जनवरी को दिल्ली के विज्ञान भवन में सहकारी समितियों के संबंध में बैठक होनी है। इसमें जो भी निर्देश दिए जाएंगे उसी के अनुरूप औषधि केंद्रों का संचालन किया जाएगा।
70 समितियों में खुले जन सुविधा केंद्र
पिथौरागढ़। केंद्र सरकार की ओर से सहकारी समितियों में जन सुविधा केंद्र खोले ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। एआर कोऑपरेटिव सीएस पांगती ने बताया कि जिले में स्थित 74 समितियों में से 70 में सुविधा केंद्र खोले दिए गए हैं। केंद्रों में ग्रामीणों को विभिन्न प्रमाणपत्र बनाने, बिल जमा करने जैसी कई सुविधाएं मुहैया हो रही हैं। संवाद