नंदाकुंड से ब्रह्मकमल लाने जाते ग्रामीण
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बिर्थी, किमखेत, बेड़ूमहर और सैंणराथी गांव के 180 लोगों का दल शनिवार सुबह गाजे-बाजे के साथ ब्रह्मकमल लाने के लिए नंदाकुंड रवाना हो गया है। यह लोग आने और जाने में 150 किलोमीटर का सफर पैदल तय करेंगे। बिर्थी गांव से पुजारी संचल सिंह बृथवाल के नेतृत्व में जब लोगों का दल रवाना हुआ तो नंदा मैया की जय के नारे से आसमान गूंज उठा। शनिवार को यह लोग पहले पड़ाव थाला ठोक में रुककर रविवार सुबह नंदाकुंड जाकर नंदा देवी को अर्पित करने के लिए ब्रह्मकमल लेकर आएंगे। 28 अगस्त को यह लोग नंदा मंदिर में पहुंच जाएंगे।
बिर्थी गांव से डंगरिया बहादुर सिंह, प्रेम सिंह, गोकरण सिंह, कुणाल सिंह राठौर, सुंदर सिंह, मनोहर सिंह दानू इस दल में शामिल हैं, जबकि किमखेत, बेड़ूमहर, सैंणराथी से प्रवीण मेहरा, प्रेम सिंह, कल्याण सिंह के नेतृत्व में लोगों का दल गया है। इस इलाके में यह मान्यता है कि पुष्प लाने के लिए प्रस्थान ऋषि पंचमी के दिन होगा और नंदाष्टमी को यह पुष्प मंदिर में अर्पित किए जाएंगे। चारों गांवों के लोग थाला ठोक पहुंचकर एक साथ मिल जाएंगे। कहा जाता है कि देवी नंदा ब्रह्मकमल पुष्प से ही प्रसन्न होती हैं। नंदाकुंड जाकर लोग देवी को आयोजन में शामिल होने का न्योता भी दे आएंगे।
यह परंपरा अतीत काल से चली आ रही है। आज भी लोगों की आस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है। यहां के नंदा मंदिरों में जब 28 अगस्त की सुबह चार बजे ब्रह्मकमल लेकर आने वाले दल पहुंचेंगे तो गांव के लोग उनका स्वागत करेंगे। 29 अगस्त को मंदिरों में मेले लगेंगे।