श्रमदान से रास्ता बनाने में जुटे थर्प के ग्रामीण महिला- पुरुष।
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पिथौरागढ़। बेड़ीनाग विकासखंड में थर्प गांव के अधिकतर घरों तक पहुंचने के लिए उचित मार्ग की सुविधा तक नहीं है। शासन-प्रशासन की उपेक्षा के कारण ग्रामीणों को श्रमदान से स्वयं मार्ग बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
थर्प गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति के परिवारों के घरों तक पहुंचने के लिए पक्के रास्ते नहीं हैं। ग्रामीणों को खेतों की पगडंडियों से आवाजाही करनी पड़ती है। बरसात में भूस्खलन से यह रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के जिला संयोजक जगदीश कुमार ने कहा है कि अंतिम छोर में खड़े व्यक्ति के विकास की बात करने वाली भाजपा सरकार में गांव के लोग खुद श्रमदान कर अपने रास्ते बनाने के लिए मजबूर हैं।
गांव का मुख्य मार्ग होने के बावजूद जनप्रतिनिधि कभी सुध नहीं लेते हैं। कई गांवों में मनरेगा से मार्गों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन यहां पर मनरेगा से भी रास्ते का निर्माण नहीं किया गया है। श्रमदान कर रास्ता बनाने वालों में जीवंती देवी, रेखा देवी, कौशल्या देवी, सोनी देवी, इंद्रा देवी, कमला देवी आदि रहे।