पिथौरागढ़ । उत्तराखंड अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति त्रिस्तरीय पंचायत संगठन ने एससीएससी के आरक्षण के भीतर में क्रीमी लेयर का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण समाप्त करने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट को आगे कर रही है।
संगठन के राज्य संयोजक जगत मर्तोलिया ने प्रेस को जारी बयान में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। उन्होंने कहा कि आरक्षण मिलने के बाद एससीएसटी वर्ग का कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से ऊपर उठ भी जाता है तो उसे भी जातीय आधार पर सामाजिक बराबरी नहीं मिल पाती है। आर्थिक आधार पर तथा उच्च नौकरियों पर आसीन अनुसूचित जाति जनजाति के अधिकारियों को भी अपने विभागों में जातीय हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक इस देश में जाति है तब तक जातिगत आरक्षण रहेगा। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक से निजीकरण, उदारीकरण की नीतियों ने आरक्षण को समाप्त जैसा कर दिया है। इसके लिए कांग्रेस तथा भाजपा की सरकार है सीधे तौर पर दोषी रही है। उन्होंने कहा कि इन सरकारों के साथ मिलकर सरकारों में शामिल दल भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं। इस मुद्दे पर संगठन की ओर से प्रत्येक जिला मुख्यालय में सेमिनार आयोजित कर समाज को इन फैसलों के खिलाफ पुरजोर विरोध करने के लिए जागरूक करेगा।
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