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Pithoragarh News: अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं, बच्चों का इलाज भगवान भरोसे

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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। यहां संचालित सीएचसी विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे हैं। किसी भी सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं और बच्चों के इलाज के लिए परिजन भटक रहे हैं। हालात यह हैं कि अभिभावकों को बच्चों के लिए उपचार के लिए 100 किमी दूर जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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सीमांत जिले के बेड़ीनाग, मुनस्यारी, गंगोलीहाट में सीएचसी जबकि धारचूला में संयुक्त अस्पताल संचालित हैं। सभी में बाल रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत है, लेकिन किसी में भी बच्चों के डॉक्टर नहीं है। रोज इन अस्पतालों में 120 से अधिक लोग अपने बीमार बच्चों को लेकर उपचार के लिए पहुंचते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ न होने से उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
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नेपाल से भी बीमार बच्चे परिजन ला रहे धारचूला संयुक्त अस्पताल
पिथौरागढ़। भारत-नेपाल सीमा पर धारचूला में संचालित संयुक्त चिकित्सालय में भारत के साथ ही नेपाल के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। नेपाल के लोग भी बेहतर उपचार की उम्मीद में अपने बच्चों को लेेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर अन्य अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। संवाद
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मानसूनकाल में बढ़ी दिक्कत
पिथौरागढ़। आपदा की दृष्टि से सीमांत जिला संवेदनशील है। यहां मानसूनकाल में आए दिन सड़कों बंद हो रही हैं। बारिश के मौसम में बच्चों में बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। बच्चे टायफाइड, पीलिया, वॉयरल, डायरिया की जकड़ में फंस रहे हैं। स्थानीय स्तर पर खोले गए अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ न होने से अभिभावक बच्चों को बारिश, बंद सड़कों के बीच किसी तरह जिला अस्पताल लेकर पहुंच रहे हैं। संवाद
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कोट -
- सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत हैं। फिलहाल इनकी तैनाती नहीं हो सकी है। उम्मीद है रिक्त पदों पर जल्द विशेषज्ञों की तैनाती होगी। - डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
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