भित्तिचित्र कार्यशाला के दौरान घंटाकरण की दीवारों पर चित्र बनाते चित्रकार
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नगर की खाली और सूनी पड़ी दीवारों पर अब लोक संस्कृति के रंग दिखाई देंगे। मंगलवार से तीन दिनी भित्ति चित्रण कार्यशाला की शुरुआत हो गई है। पहले चरण में घंटाकरण में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा के पास की खाली दीवारों पर हिलजात्रा और बग्वाल के चित्र तैयार किए गए हैं। अगले चरण में देवसिंह मैदान और विकास भवन के सामने की दीवारों पर भी इसी तरह के चित्र बनाए जाएंगे।
सोर कलाकार कल्याण समिति के संयोजक ललित मोहन कापड़ी के संरक्षण और हरीश चंद्र गहतोड़ी के संयोजन में चल रही अपने तरह की इस विशेष कार्यशाला में कमरों में बैठकर नहीं वरन सड़कों के किनारे की दीवारों पर चित्र बनाने का काम किया जा रहा है। नगर की दीवारों को सजाने के लिए मुजफ्फरनगर के प्रसिद्ध चित्रकार प्रवीण सैनी, मेरठ के संतोष साहनी, प्रदीप सैनी, हल्द्वानी के जगदीश पांडे, बुलंदशहर के विजयपाल सिंह, अल्मोड़ा के गोकुल नागी, चंपावत के हरीश गहतोड़ी और पिथौरागढ़ के सुनील लोहिया यहां जुटे हैं। इन खाली दीवारों पर जब सजीव चित्र उकेरे गए तो एक बार के लिए सड़क पर चलने वालों के कदम जरूर ठहर रहे हैं।
दीवारों पर बनाए जा रहे इन चित्रों में भाव और भंगिमा दोनों ही है। ललित मोहन कापड़ी ने बताया कि इस कार्यशाला को हमारी संस्कृति, हमारी पहचान नाम दिया गया है। उन्होंने बताया कि नगर के प्रमुख व्यवसायी संजय भसीन ने रंग और ब्रुश दिए हैं। चित्रकारों के लिए चाय, पानी और नाश्ते की व्यवस्था भी शहर के लोग ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 29 जून तक नगर के विभिन्न स्थानों पर भित्ति चित्र कार्यशाला जारी रहेगी। कला में रुचि रखने वालों से अपील की गई है कि वह इस आयोजन में भाग लें। कार्यशाला में गोविंद बिष्ट और ज्योति प्रकाश पुनेठा सहयोग कर रहे हैं।