पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में लोग अब चूख से बने जैम का आनंद उठा सकते हैं। मूनाकोट में हिसालू किसान संगठन से जुड़ी महिलाओं ने इसको बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। जल्द ही इसे बाजार में उतारा जाएगा। चूख का जैम बनाने का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के प्रसिद्ध फल चूख को देश विदेश में पहचान दिलाकर महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।
उत्तराखंड के पहाड़ों पर आमतौर पर सर्दियों में फलों की अनेक किस्में पैदा होती है। इसमें नींबू प्रजाति की एक किस्म होती है चूख। कुमाऊं में इसे चूख जबकि गढ़वाल में इसे पहाड़ी नींबू कहा जाता है। पहाड़ों से हो रहे पलायन और जंगली जानवरों के उत्पात के बाद इसके उत्पादन में पहले की तुलना में गिरावट आई है। पहाड़ों में बहुत अधिक मात्रा में पाए जाने वाले चूख को बाजार नहीं मिलने के कारण काश्तकारों में इसके उत्पादन को लेकर कम दिलचस्पी रह गई है।
मूनाकोट हिसालू किसान कंपनी से जुड़ी 20 महिलाओं ने इसका जैम बनाना शुरू कर दिया है। इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो रखी गई है। इन महिलाओं को महाराष्ट्र से आए ट्रेनरों ने चूख से जैम बनाने की बारिकियां सिखाई हैं। जिला स्तरीय फेडरेशन की अध्यक्ष रेखा भट्ट का कहना है कि चूख के जैम की अच्छी डिमांड है। इसे जल्द देहरादून, हल्द्वानी, दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में भेजा जाएगा।
बच्चों के लिए है काफी फायदेमंद
पिथौरागढ़। चूख से बना जैम महिलाओं और बच्चों के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन सी, फाइबर, मैग्नीशियम और पोटेशियम पाए जाने के कारण हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पेट, हार्ट और त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए बेहद फायदेमंद है। प्रदेश के ठंडे क्षेत्रों में नींबू (चूख) अपने आप में गुणकारी होने के साथ ठंड से राहत दिलाने का भी काम करता है। संवाद
काश्तकारों को मिलेगा प्रोत्साहन
पिथौरागढ़। चूख का जैम बनाकर बाजार में उतारने का मुख्य उद्देश्य काश्तकारों को प्रोत्साहित करना और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है। बाजार नहीं मिलने के कारण अधिकतर काश्तकारों के चूख पेड़ों से गिरकर खराब हो जाता है। जैम बनने के बाद काश्तकारों को बाजार मिलेगा और वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। संवाद
कोट
चूख का जैम बनाकर बाजार में उतारने का मुख्य उद्देश्य उसे देश-विदेश में पहचान दिलाना है। वर्तमान में 20 महिलाएं जैम बनाने का कार्य कर रही हैं। धीरे-धीरे अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। - महेश पाल, सीईओ, हिसालू फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पिथौरागढ़।