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‘अर्जुन’ बनने का ख्वाब देख रहे बच्चों को ‘द्रोणाचार्य’ का इंतजार

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अस्कोट (पिथौरागढ़)। कभी सोचा है कि अगर द्रोणाचार्य नहीं होते तो क्या अर्जुन अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर पाते? क्या वह विश्व के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बन पाते? नहीं ना, क्योंकि गुरु से मिले ज्ञान के बिना शिखर छू पाना संभव नहीं हो पाता है। कुछ ऐसा ही हाल अस्कोट के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का भी है। डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस अधिकारी आदि बनने का ख्वाब देखने वाले यहां के बच्चों पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय के सुगम होने के कारण न तो पदोन्नति पर शिक्षक दिया गया और न नियुक्त ही हो पाई है। इस कारण पिछले साल दिसंबर से विद्यालय का संचालन अस्थायी व्यवस्था के तहत किया जा रहा है। विद्यालयों में 20 बच्चे पढ़ते हैं। वहीं अस्कोट द्वितीय विद्यालय कई वर्षों से एकल शिक्षक के भरोसे संचालित है। जीआईसी में एलटी में सामाजिक शिक्षा और गणित के अध्यापक नहीं है। राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल खोलियागांव में अध्ययनरत अधिकतर बालिकाएं गरीब परिवारों की हैं। इसके बावजूद वहां एक भी महिला शिक्षिका नहीं है। इसी प्रकार स्थानीय जीआईसी में एलटी संवर्ग में सामाजिक विज्ञान और गणित विषय के सहायक अध्यापक भी नहीं हैं।
अस्कोट प्रथम विद्यालय सुगम क्षेत्र में है। इसलिए प्रमोशन में नियुक्त होने पर शिक्षक की तैनाती होगी। कन्या स्कूल में महिला, पुरुष कोई भी पढ़ा सकता है। खाली पदों पर शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। - एके गुसाई, जिला शिक्षाधिकारी, पिथौरागढ़।
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विद्यालय का शीघ्र संचालन शुरू किया जाना चाहिए। इससे बच्चों को सुविधा मिलेगी और नवनिर्मित विद्यालय भवन का भी सदुपयोग होगा। - आशा देवी एसएमसी अध्यक्ष।
लाखों की लागत से विद्यालय भवन तो बना दिया लेकिन शिक्षक नहीं भेजे गए हैं। शिक्षा विभाग से कई बार शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की जा चुकी है। -बहादुर सिंह बिष्ट, प्रधान हिनकोट।
नया स्कूल भवन बनने के बाद भी इसमें कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ है। इसलिए हमें दूसरे स्कूल में पढ़ने जाना पड़ता है। शीघ्र इस स्कूल का संचालन करना चाहिए। -प्रिया, छात्रा।
स्कूल में कक्षाओं का संचालन न होने से उन्हें दूसरे स्कूल में जाना पड़ता है। यदि इस स्कूल में पठन-पाठन शुरू होता तो यहां के बच्चों को दूसरे स्कूल नहीं जाना पड़ता। -निशा, छात्रा।
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