फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मड़मानले अस्पताल में सुविधाएं न होने से आवासीय भवनों में उगी घास

विज्ञापन
मूनाकोट के मड़मानले का ऐलोपैथिक अस्पताल। - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
मूनाकोट (पिथौरागढ़)। मूनाकोट ब्लॉक के दूरस्थ का मड़मानले अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। अस्पताल में सामान्य जांचें भी नहीं होने के कारण लोगों को मजबूरन जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
विज्ञापन

रखरखाव के अभाव में अस्पताल में कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए गए भवनों में घास उगने लगी है। बरसात आते ही भवन कई जगह से लीक करने लगता है। भवनों में डॉक्टरों के न रहने के कारण इमरजेंसी वाले मरीजों को मजबूरन दूसरे अस्पताल जाना पड़ता है। अस्पताल में वार्डब्वॉय और स्वच्छक न होने से अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
मूनाकोट ब्लॉक के सुदूरवर्ती रोसरा, फलप्यागैर, भौतड़ी, गलात, मड़ आदि गांवों को स्वास्थ्य सुविधा देने वाले एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसईडी) मड़मानले से कुछ दिन पहले एक डाक्टर को डीडीहाट भेज दिया है। अस्पताल में हालांकि कोविड महामारी के चलते एक ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर तो उपलब्ध कराया गया है लेकिन यहां खून और शूगर जैसी सामान्य जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन

रखरखाव के अभाव में अस्पताल के पास कर्मचारियों के लिए बने आवासीय भवनों में घास उग गई है। भवनों की खिड़कियों के शीशे और दरवाजे गायब हैं। पानी की सुविधा तक नहीं है। अस्पताल में बिजली की लाइन बहुत पुरानी होने से कई जगह तार कटे है। इस कारण अस्पताल में लगे बिजली के अधिकतर स्विच काम नहीं करते है।
अस्पताल में तैनात डॉक्टर दो बजे बाद इमरजेंसी वाले मरीजों को देखना भी चाहे तो वह यहां नहीं रुक सकते हैं। मरीज और तीमारदारों के हाथ धोने के लिए लगे वॉशबेसन का पाइप टूट चुका है। अस्पताल में तैनात एक मात्र एएनएम पर अस्पताल के अलावा गांवों में स्वास्थ्य सुविधा देने की भी जिम्मेदारी है। सुविधाएं न होने से यह डिस्पेंशरी मरीजों के लिए रेफरल सेंटर बन चुका है।
सरकार ने दूरस्थ के इस अस्पताल में सामान्य खून जांच की सुविधा तक नहीं दी है। क्षेत्र के लोगों को शुगर जांच करने के लिए भी जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। सरकार ने सीमांत के गांवों से पलायन रोकने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए। - ऊषा कोहली, ग्रामप्रधान, मड़मानले।
- ऊषा कोहली, ग्रामप्रधान, मड़मानले।
सीमांत के गांवों में स्वास्थ्य सुविधा देने वाले अस्पतालों के हाल बहुत बुरे हैं। मड़मानले के अस्पताल में एक ही डाक्टर के होने से दो बजे बाद इलाज की सुविधा नहीं मिलती है। दो बजे बाद कोई घटना घटित हो जाए तो जिला अस्पताल जाना पड़ता है। - पंकज, युवक मंगल दल अध्यक्ष, मड़मानले।
- पंकज, युवक मंगल दल अध्यक्ष, मड़मानले।
एलोपैथिक डिस्पेंसरी (एसईडी) मड़मानले का एक माह पहले ब्लॉक के डॉक्टरों की टीम ने भ्रमण किया है। अस्पताल की समस्याओं और आवासीय भवनों में पानी, बिजली की दिक्कत को टीम ने स्वयं देखते हुए शासन को भी भेजा है। - डॉ. शैलजा कापड़ी प्रभारी एसईडी, मड़मानले।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें