पिथौरागढ़। पथरी का आसानी से ऑपरेशन कर मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए जिला अस्पताल में ढाई करोड़ की लिथोट्रिप्सी मशीन खुद बीमार हो गई है। दो महीने पहले तकनीशियन बुलाकर इसे ठीक कराने के दावे किए गए जो हवाई साबित हुए हैं। लंबा समय बीतने के बाद भी मुंबई से तकनीशियन पिथौरागढ़ नहीं पहुंच सके हैं और मरीज पथरी के ऑपरेशन के लिए हायर सेंटर की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
सीमांत जिले के लोगों को स्थानीय स्तर पर बगैर चीरा-टांके आधुनिक तकनीक से पथरी के ऑपरेशन की सुविधा मिल सके, इसके लिए वर्ष 2016 में ढाई करोड़ से लिथोट्रिप्सी मशीन खरीदी गई थी।
जिला अस्पताल में तीन साल तक संचालित होने के बाद मशीन में खराबी आ गई जो अब तक ठीक नहीं हो सकी है। कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हुए तो स्वास्थ्य विभाग ने दो महीने पूर्व मुंबई से तकनीशियन बुलाकर मशीन को जल्द ठीक करने के दावे किए।
अब तक तकनीशियन पिथौरागढ़ नहीं पहुंच सके हैं। जिला अस्पताल में हर महीने औसतन 80 से अधिक मरीज पथरी के उपचार के लिए पहुंचते हैं। लिथोट्रिप्सी मशीन का संचालन न होने से मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। ऐसे में मरीज आधुनिक तकनीक से पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए मैदानी क्षेत्रों की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि लिथोट्रिप्सी मशीन को ठीक करने के लिए कंपनी से संपर्क किया गया है। मुंबई से तकनीशियन आने हैं। उम्मीद है जल्द मशीन की खराबी दूर होगी।
मशीन की खराबी दूर न होना खड़े कर रहा है सवाल
पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में करोड़ों की मशीन का ठीक न होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में मशीन के संचालन के लिए विशेषज्ञ भी हैं। मशीन ठीक होती तो स्थानीय स्तर पर पथरी का बेहतर उपचार मिलता। कहना कि मरीज निजी अस्पतालों की दौड़ लगा रहे हैं। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर संदेह है।