पिथौरागढ़। जिले की चार विधानसभाओं के 32 तोक ऐसे हैं जहां न बच्चों की किलकारी है और न ही चुनावी शोर। यहां हैं तो बस पुराने बंद पड़े मकान और बंजर पड़ी जमीन। बुनियादी सुविधाओं का अभाव और बेहतर भविष्य की उम्मीद में यहां से पलायन हुआ है। गैर आबाद गांवों में धारचूला के नौ, डीडीहाट के 11, पिथौरागढ़ के 11 और गंगोलीहाट का एक तोक शामिल हैं। 30 गांवों के इन 32 तोकों में न कोई आबादी है और न ही इनमें कोई मतदाता है।
पिथौरागढ़ जिले की पिथौरागढ़ विधानसभा सीट में नौ गांवों के 11 तोक गैर आबाद हैं। इनमें बांस का सैनकनलका, भुरमुनी का सनकटिया, विषाड़ का सरड़ा विषाड़, कनारी पाभैं का कुसौली नयावाद, सुवाकोट का दिगरानी, रूईना का चिटगलिया, पंत्यूड़ी का गिंडागांव, डुंगराकोट का कोठेरा और दुविधा, जमतड़ी का ज्ञालभाट और कालाबन तोक शामिल है।
डीडीहाट विधानसभा के 11 गैर आबाद तोकों में दूनाकोट का घनधूरा, धाराकौली का रजड़ेत, कुकरौली का करौली, हरड़कटिया का पारीसेरा, सौगांव का ओलीगैर, अजेड़ा का अजेड़ामध्ये भरपाटा, गर्खा का नामक, बगड़ीहाट का चामीगर्खा, बीसाबजेड़ का बलेत, गाड़गांव का दांगड़ और दोली का ढोलीगांव तोक शामिल हैं।
धारचूला विधानसभा क्षेत्र में धापा का लड़ीग्वार, दरांती का अगोड़िया, कवाधार का चौड़ा चिमला, सेरा का हड़तोला, राप्ती का बिर्थी तराली, नामिक का कैंठी, सोसा का पुनलाभटका, पांगू का गुमकाना, गर्गुवा का लूम और गो का खिमलिंग तोक गैर आबाद है।
गंगोलीहाट में पिनारी गांव का बयां तोक गैर आबाद है। जिले की चार विधानसभाओं में गैर आबाद हुए इन गांवों में आज से तीन-चार दशक पहले तक लोग रहते थे, लेकिन पलायन के कारण धीरे-धीरे जन विहीन हो गए।