पिथौरागढ़। कोरोना काल में नियुक्त किए गए 400 कर्मियों को निकालने से संविदा कर्मियों में आक्रोश है। नाराज कर्मियों ने रामलीला मैदान में सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में घर-परिवार की चिंता किए बगैर इमानदारी से कार्य किया। अब वेतन मांगने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने शीघ्र वेतन नहीं देने और दोबारा काम पर नहीं रखने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को कर्मचारी कलक्ट्रेट स्थित रामलीला मैदान में एकत्र हुए। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने संविदा कर्मियों से सेवाएं ली। अब विभाग का काम निकल गया है उन्हें तीन माह का वेतन दिए बगैर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि वेतन मांगने पर उन्हें निकाला गया है। वेतन नहीं मिलने से परिवार के भरण पोषण में दिक्कत हो रही है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग और सरकार को कर्मचारियों का दर्द नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने शीघ्र कर्मचारियों को बहाल नहीं करने और वेतन नहीं देने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
ये लोग रहे मौजूद
इस मौके पर दीपा मेहता, गीता कुमारी,ज्योति लोहिया, ऋतु, प्रियंका, रेनू सामंत, ज्योति धामी, हेमंत, बसंत सिंह, कमल सिंह, रेनू गिरी, हिमांशु, अमित, निर्मला, ज्योति, मनीषा लोहिया, मीना वल्दिया, पुष्पा बिष्ट, पूजा नेगी, प्रियंका, गीता पांडेय सहित कई लोग मौजूद रहे।
हमें तीन माह के लिए ठेका प्रथा के अंदर रखा गया था। हमने घर परिवार छोड़कर वैक्सीनेशन और सैंपलिंग की। चार माह काम करने के बाद भी वेतन नहीं दिया गया। वेतन की मांग की गई तो हमें काम से निकाल दिया गया। सरकार ने वेतन देने के बजाए सेवा समाप्ति का लेटर थमा दिया। - ज्योति धामी।
सुबह डीएम साहब से वेतन देने की मांग की थी शाम को हमारी सेवाएं समाप्त कर दी गई। निकालने का कारण भी नहीं बताया गया। हमें फोन पर आदेश भेजा गया कि आपकी सेवाएं समाप्त हो गई हैं। तीन माह के लिए ही रखा था तो पहले बता देते हम तीन माह पहले ही चले जाते। - नवीन जोशी।
मामले में कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि जब 2022 तक रखा गया तो बीच में क्यों निकाल दिया। उन्होंने डीएम से फोन में बात की तो डीएम ने बताया कि फंड नहीं होने के कारण निकाला गया है। अन्य जिलों में बजट है तो यहां बजट क्यों नहीं है। - रेनू सांमत।
स्वास्थ्य विभाग ने हमें बिना बताए बिना किसी कारण के बाहर निकाला है जो सही नहीं है। सभी कर्मचारी पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहे थे। आगे क्या करें कुछ पता नहीं चल रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने हमें फिर बहाल करना चाहिए और शीघ्र वेतन का भुगतान करना चाहिए। - ललित मोहन जोशी
कोरोना की दूसरी लहर में ऊपरी स्तर से निर्देश मिले थे कि कार्यों के संपादन के लिए स्थानीय स्तर पर कर्मियों को रखा जाए। कोरोना का प्रकोप कम है। इस वजह से उन्हें निकाला गया है। बजट नहीं है अगर शासन स्तर से कर्मियों को दोबारा रखने के आदेश मिलेंगे तो उन्हें रख लिया जाएगा। कर्मचारियों को वेतन देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। - डॉ. एचसी पंत, सीएमओ पिथौरागढ़।
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