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62 साल में जिला मुख्यालय को कंक्रीट का जंगल तो गांवों को मिला पलायन का दर्द

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पिथौरागढ़ शहर। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। 24 फरवरी 1960 को अल्मोड़ा से अलग होकर जिला बना पिथौरागढ़ 24 फरवरी 2022 को 62 वर्ष का हो गया। जिला गठन के 62 सालों में भी जिले में सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है। पिछले छह दशकों में जिला मुख्यालय सोरघाटी कंक्रीट के जंगल में तब्दील हुई तो जिले के गांवों को पलायन का दर्द मिला।
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पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली जिलों का गठन वर्ष 1960 को किया गया। चीन और नेपाल की सीमा से सटा पिथौरागढ़ जिला गठन से पहले अल्मोड़ा जनपद की एक तहसील हुआ करती थी। चीन और नेपाल सीमा से लगा होने के कारण इस जिले का विशेष महत्व रहा है। अलग जिला बनने के बाद जिस विकास की उम्मीद थी उसके उलट ऐसा नहीं हो सका।
पांच लाख की आबादी वाले सीमांत जिले का सेना में बड़ा प्रतिनिधित्व है। सेना में प्रतिनिधित्व के मामले में पिथौरागढ़ जिला दूसरे स्थान पर है। यहां के हजारों शूरवीरों ने देश की आजादी में भाग लिया था इसलिए इस जिले को वीरों की भूमि भी कहा जाता है। स्व.त्रिलोक सिंह बसेड़ा, कैप्टन हरी सिंह थापा, राजेंद्र पुनेड़ा सहित यहां के तमाम गांवों के युवाओं ने सेना में भर्ती होकर खेलों में भी उम्दा प्रदर्शन कर पूरी दुनियां में देश का नाम रोशन किया है।
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परेशानियां बेशुमार
- गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से पलायन का जो क्रम शुरू हुआ वह आज भी जारी है। 60 से अधिक गांव पूरी तरह से खाली हो गए तो 300 से अधिक गांवों से 10 से 40 परिवारों ने गांव छोड़कर नगरों या शहरों में मकान बना लिए।
-जिले की सड़कें छह दशक बाद भी बदहाल ही हैं। लोगों को मैदान तक पहुंचने के लिए छह से आठ घंटे तक गड्ढायुक्त सड़कों में झटके खाते हुए सफर करना पड़ता है।
-नैनीसैनी में हवाई पट्टी निर्माण के 27 साल बाद सीमांत जिले से शुरू हुई हवाई सेवा भी नियमित नहीं होने से लोग मायूस हैं।
-मैग्नेसाइट, खड़िया सहित तांबा और सोने की खदानें होने के बावजूद जिले में उद्योग धंधे स्थापित नहीं हो सके। आज से 25 साल पहले तक स्थायी और अस्थायी तौर पर एक हजार लोगों को रोजगार देने वाली मैग्नासाइट फैक्ट्री बंद पड़ी है। यहां के शिक्षित युवा छोटे मोटे रोजगार के लिए शहरों की खाक छानने के लिए मजबूर हैं।
नई तहसीलें और निकाय मिले सुविधाएं नहीं
पिथौरागढ़। 1657 गांवों वाले जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 483440 है। जिले में विण, मूनाकोट, कनालीछीना, डीडीहाट, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला और मुनस्यारी आठ विकासखंड हैं। पहले केवल छह तहसीलें पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी, धारचूला थी। राज्य गठन के बाद कनालीछीना, देवलथल, नाचनी, बंगापानी, थल, तेजम, गणाईगंगोली तहसील और पांखू उप तहसील का गठन किया गया। विकास के नाम पर नई तहसीलों का गठन तो किया गया लेकिन कई तहसीलों में एसडीएम तो दूर नायब तहसीलदार तक तैनात नहीं हैं। पिथौरागढ़, डीडीहाट, धारचूला, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट पांच नगर निकाय हैं लेकिन नगर क्षेत्र की जनता को गांवों जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
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