पिथौरागढ़। इस बार का मौसम सभी के लिए पहेली बन गया है। मध्य जनवरी के बाद भी बारिश के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। आसमान में बदरा तो छा रहे हैं लेकिन कुछ देर बाद गायब हो जा रहे हैं। मौसम विज्ञानी इसे अलनीनो का प्रभाव बता रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले 13 साल में इस बार सबसे अधिक सूखी ठंड का असर रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, सीमांत जिले में एक जनवरी का दिन इस महीने अब तक सर्वाधिक गर्म रहा। इस दिन अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद तापमान में उतार-चढ़ाव आते रहा। आपदा कंट्रोल रूम के अनुसार, शुक्रवार को अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम 6 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार को अधिकतम तापमान दो डिग्री बढ़कर 19 डिग्री पहुंच गया। तापमान बढ़ने से दोपहर में हल्की गर्मी का अहसास भी होने लगा है। हालांकि सुबह-शाम कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
पंतनगर विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अजीत सिंह नैन ने बताया कि वर्ष 2013 के बाद इस बार सबसे अधिक सूखी ठंड पड़ी है। उन्होंने बताया कि अलनीनो का प्रभाव उत्तराखंड के पर्वतीय और तराई क्षेत्र में देखा जा रहा है। मौसम विभाग की ओर से 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले इलाकों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई थी जो सच साबित नहीं हुई। बर्फबारी नहीं होने से हिमालय की चोटियां काली पड़ चुकी हैं।
आदि कैलाश और पंचाचूली जैसी ऊंची चोटियों पर भी अभी तक बर्फ नहीं गिरी है। बर्फबारी नहीं होने से कीड़ाजड़ी के उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका है। निचले इलाकों में बारिश नहीं होने से बीज अंकुरित नहीं हो पा रहे हैं। मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि अभी तक के सर्वे में फसलों को आठ से 10 फीसदी का नुकसान हुआ है। फसलों के नुकसान का अभी भी आकलन किया जा रहा है।
क्या है अलनीनो
अलनीनो प्रशांत महासागर के भू मध्य रेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के औसत से अधिक गर्म होने की एक मौसमी घटना है। यह मौसम के बदलाव को प्रभावित करता है। इसके प्रभाव से कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ जैसी घटनाएं होती हैं। संवाद