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जिला मुख्यालय में बनाया जाए महाविद्यालय

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पिथौरागढ़ महाविद्यालय। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जुलाई 2020 में पिथौरागढ़ महाविद्यालय को कैंपस का दर्जा दिया गया। इसके बाद महाविद्यालय के भवन में राजकीय महाविद्यालय के साथ ही कैंपस गतिविधियां भी शुरू हुईं। कैंपस का दर्जा मिलने के बाद सीमांत में खुशी का माहौल था मगर अब कैंपस बनने के बाद लोग परेशान है।
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सबसे अधिक छात्रों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है। पूर्व छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पिथौरागढ़ में अलग से राजकीय महाविद्यालय खोला जाए, जिससे कैंपस के साथ ही छात्रों को महाविद्यालय में पढ़ने का भी मौका मिले। जिन छात्रों को कैंपस में प्रवेश नहीं मिल पाएगा वो महाविद्यालय में प्रवेश ले सकेंगे।
कई पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी पिथौरागढ़ को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग भी लगातार करते आ रहे हैं। वर्तमान में कैंपस पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाया है।
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वर्तमान में कोरोना के चलते कैंपस में क्षमता से अधिक 40 फीसदी छात्रों को प्रवेश दिया गया। मगर कैंपस की गतिविधियां पूरी तरह चलने के बाद भविष्य में ऐसा फिर से होगा या नहीं, ये सवालिया निशान खड़ा करता है।
पिथौरागढ़ में राजकीय महाविद्यालय खुलना चाहिए, जिससे हर तबके के छात्र को प्रवेश मिल सके। हमने केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग की थी मगर कैंपस का दर्जा दिया गया। इसे पुराने ही भवन में संचालित किया जा रहा है। जबकि कैंपस या महाविद्यालय का अलग भवन होना चाहिए। - भगवान रावत, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
कैंपस खुलने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। अगर कैंपस पूरी तरह से संचालन में आ जाता है तो सभी बच्चों केे प्रवेश मिलना मुश्किल हो जाएगा।
गरीब तबके का छात्र कैसे कैंपस में महंगी फीस दे सकेगा। यहां पर ज्यादातर परिवार कृषि कार्य कर जीवन यापन करते हैं। ऐसे में उनक छात्रों के लिए महाविद्यालय खोला जाए। - हिमांशु ओझा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष
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