धारचूला (पिथौरागढ़)। सात साल बाद भारत-चीन व्यापार बहाल होने की उम्मीद के बीच व्यापारियों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। चीन की शर्त के अनुसार बगैर नया सामान लिए तकलाकोट मंडी पहुंचे 16 भारतीय व्यापारियों को वहां वर्ष 2019 से पड़ा अधिकांश माल खराब मिला है। अब उन्हें भारत से नया सामान भेजे जाने की अनुमति का इंतजार है।
सात साल बाद बमुश्किल शुरू हुए भारत-चीन व्यापार के लिए चीन ने एक अगस्त को 16 व्यापारियों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी थी। हालांकि, इसके साथ शर्त रखी गई कि व्यापारी बिना नया सामान लिए मंडी पहुंचेंगे और वर्ष 2019 से वहां रखे सामान से ही व्यापार करेंगे। व्यापारी जब तकलाकोट पहुंचे तो लंबे समय से पड़ा अधिकांश सामान खराब मिला। इससे व्यापारियों की मुश्किल बढ़ गई है।
तकलाकोट पहुंचे व्यापारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश भेजकर बताया कि उन्हें अब तक भारत से नया सामान लाने की अनुमति नहीं मिली है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में व्यापार का समय बीत रहा है और वे खाली बैठे हैं। यदि जल्द भारत से सामान तकलाकोट नहीं पहुंचा तो व्यापार का सीजन खत्म होने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
व्यापारियों ने बताया कि चीन से व्यापार की अनुमति मिलने की उम्मीद में करीब दो माह पहले ही गुड़, मिश्री, कपड़े समेत अन्य लाखों रुपये का सामान गुंजी पहुंचा दिया गया था। यह सामान अब भी गुंजी के गोदामों में रखा हुआ है।
46 व्यापारियों को अब तक नहीं मिली अनुमति
भारत-चीन व्यापार के लिए इस बार 62 व्यापारियों ने ट्रेड पास बनाए हैं। चीन ने फिलहाल उन्हीं व्यापारियों को तकलाकोट जाने की अनुमति दी है जिनका सामान वर्ष 2019 से वहां पड़ा हुआ है। इसके चलते 16 व्यापारी ही तकलाकोट पहुंच सके हैं। दूसरी ओर 46 व्यापारी ऐसे हैं जिन्हें अब तक तकलाकोट जाने की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में व्यापार का सीजन शुरू होने के बावजूद व्यापारी खाली बैठे हैं और नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
भारतीय प्रशासन लगातार चीन को ई मेल कर रहा है जिसका अब तक जवाब नहीं मिला है। मामले में विदेश मंत्रालय से भी वार्ता हो रही है। चीन या विदेश मंत्रालय से भी जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे उसके अनुरूप काम किया जाएगा।
-आशीष जोशी, ट्रेड अधिकारी, धारचूला
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भारत को जल्द सामान तकलाकोट भेजने और अन्य व्यापारियों को अनुमति दिलानी चाहिए। यदि जल्द सामान तकलाकोट नहीं पहुंचा तो व्यापारियों को नुकसान होगा।
-जीवन सिंह रौंकली, अध्यक्ष, भारत-चीन व्यापार समिति