पिथौरागढ़ जिले और दुर्गम जिले में दिल के डॉक्टर की छह साल बाद भी तैनाती नहीं हो सकी। अब आईपीएचएस (इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड) के मानकों में बदलाव के चलते कार्डियोलॉजिस्ट का पद खत्म कर दिया है। सीमांत जिले में दिल के डॉक्टर की तैनाती का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। दिल के मरीजों के सामने जांच और उपचार के लिए हायर सेंटर की दौड़ लगानी पड़ेगी।
विषम भौगोलिक स्थिति के बीच बसे दुर्गम सीमांत जिले में दिल के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक हर साल 250 से अधिक दिल के मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत था। आठ साल पूर्व उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कार्डियोलॉजिस्ट की यहां तैनाती नहीं हो सकी। लोगों को उम्मीद थी कि कभी न कभी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होगी और उन्हें दिल का दर्द दूर करने के लिए मैदानी क्षेत्रों का रुख नहीं करना होगा। अब सीमांत के लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है। ऐसा इसलिए है कि जिला अस्पताल में आईपीएचएस के मानकों के अनुसार कार्डियोलॉजिस्ट का पद खत्म कर दिया है। ऐसे में अब दिल के मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।
हायर सेंटर पहुंचाना भी मुश्किल
पिथौरागढ़ जिले में कार्डियोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी बन गया है। ऐसे में मरीजों के लिए हल्द्वानी या बरेली सुरक्षित पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में जिले से रेफर 15 से अधिक दिल के मरीजों को हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही काल के गाल में समाना पड़ा।
बेस अस्पताल में भी कार्डियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं
आईपीएचएस के मानकों के अनुसार जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद समाप्त हुआ है। पद सृजित होने के बाद ही दिल के डॉक्टर की तैनाती संभव है।
-डॉ. एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।
बेस अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं है। ऐसे में यहां इनकी तैनाती नहीं हो सकती। पद सृजित होने पर यह संभव है।
-डॉ. अजय आर्या, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़।