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मुनस्यारी में मिली कोमोडोर प्रजाति की तितली

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पिथौरागढ़। विंग्स फाउंडेशन और ईडीसी मुनस्यारी ने ग्रेट बटर फ्लाई काउंट के दौरान कोमोडोर प्रजाति की तितली को खोज निकाला है। यह तितली भारत में अंडर शेड्यूल द्वितीय श्रेणी ऑफ वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 में संरक्षित प्रजाति की श्रेणी में आती है। कोमोडोर तितली मिलने के बाद पर्यावरण प्रेमियों में खुशी की लहर है। लंबे समय बाद उन्हें एक ऐसी बड़ी उपलब्धि मिली है।
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विंग्स और ईडीसी के 16 सदस्य कोमोडोर तितली की अन्य प्रजातियों को भी खोजने में जुटे हैं। जिले में ग्रेट बटर फ्लाई काउंट के तहत विंग्स फाउंडेशन के 16 सदस्यों ने विभिन्न स्थानों पर 139 तितलियों की खोज की है। फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि जिले में राज्यीय तितली कॉमन पीकॉक बेहद कम जगह दिखाई दी। पूर्व के मुकाबले जैवविविधता में काफी कमी आई है। इस कारण कॉमन पीकॉक को आसानी से देख पाना मुश्किल हो गया है।
खतरे में है राज्यीय तितली का भविष्य
पिथौरागढ़। 2016 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में कॉमन पीकॉक को राज्य तितली के रूप में चुना गया। विशेषज्ञों की माने तो इस तितली का अस्तित्व खतरे में है। तिमूर के पेड़ पर मंडराने वाली पीकॉक तितली को उसकी खूबसूरती के लिए 1996 में लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में सबसे सुंदर तितली का खिताब दिया गया था। यह तितली उत्तराखंड की राज्यीय तितली है, जो हिमालय में 1000 से 2500 मीटर ऊंचाई तक पाई जाती है। कॉमन पीकॉक तिमूर के पत्तों पर अंडे देती हैं। उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय से लेकर चाइना तक में यह पाई जाती है।
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उत्तराखंड में पाई जाती हैं 550 तितली
पिथौरागढ़। भारत में तितलियों की 1400 प्रजाति पाई जाती हैं, जिसमें से 550 तितली सिर्फ उत्तराखंड राज्य में पाई जाती हैं। जैव विविधता में कमी के कारण तितलियां खतरे में हैं। सजावटी और हाई ब्रिड पौधे तितलियों के लिए किसी काम के नहीं होते हैं। जंगलों की कटाई, मैदानों और बगीचों की सफाई के बहाने जंगली बेलों, पौधों को खत्म करना मानव की बड़ी भूल है। इससे प्राकृतिक जैवविविधता खत्म हो रही है और तितलियों पर संकट मंडरा रहा है।
इन तितलियों की हुई खोज
पिथौरागढ़। जिले में ग्रेट बटर फ्लाई काउंट के तहत विंग्स फाउंडेशन ने खूबसूरत तितलियों का संसार ढूंढा है। इसमें येलो पैंसी, क्लाउडेड येलो, ब्लू एडमिरल, वेस्टर्न कौरटियर, पाउडरी ग्रीन स्फायर, कॉमन बैरून, कॉमन पीकॉक, इंडियान रेड एडमिरल, कॉमन जेजबेल, ऑरेंज ओक लीफ, कॉमन मॉरमोन, कोस्टर, ट्रीप ब्राउन, पीकॉक पैंसी, प्लेन टाइगर, कॉमन लैपर्ड, थ्री स्पॉटेड ग्रास यलो, स्ट्रीपड टाइगर, लेमन पैंसी,लाइम ब्लू, चॉकलेट पैंसी, ब्लू पैंसी, कॉमन पियरो, ऑरेंज टिप पियरो समेत 139 तितलियों का संसार ढूंढा।
राष्ट्रीय बटर फ्लाई के लिए चयनित तितलियां पिथौरागढ़ में हैं मिलती
पिथौरागढ़। विंग्स फाउंडेशन के निदेशक जगदीश भट्ट ने बताया कि राष्ट्रीय बटर फ्लाई के लिए सात तितलियों को रखा गया है। जिसमें कॉमन जेजेबेल, कृष्णा पीकॉक, कॉमन नबाब, नॉर्दन जंगल क्वीन तितलियां पिथौरागढ़ में मिलती है।
जिले में जैव विविधता लगातार खत्म होती जा रही है। पहले घरों के पासपास और छतों के पौधों के आसपास भी तितलियां देखने को मिलती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। तितलियों का आसपास होना जैव विविधता की समृद्धि का भी प्रतीक है। हमें प्रकृति को प्राकृतिक तरह से रखने की जरूरत है।
-दीपक कल्पासी, निदेशक, विंग्स फाउंडेशन
अत्यधिक केमिकल का उपयोग तितलियों के लिए हानिकारक है। पिथौरागढ़ जिले की जैवविविधता में अनेकों तितलियों का घर है। ऐसे में जैव विविधता को संरक्षित करना हम सबका कर्तव्य होना चाहिए। तितलियों के समग्र संसार को भविष्य में भी देखना है तो इसके लिए सभी को काम करने की जरूरत है।
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-जगदीश भट्ट, विंग्स
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