अपने हाथों से बनाए चार धाम मॉडल के साथ अनिल कुमार। संवाद
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पिथौरागढ़। हुड़ेती गांव के अनिल के हाथों में गजब का हुनर है। अनिल के हाथों के हुनर का ही कमाल है कि लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर वह चारधाम सहित कई ऐतिहासिक धरोहरों के मॉडल बना रहे हैं। उनका बनाया चारधाम का एक मॉडल राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय की शोभा भी बढ़ा रहा है।
जिला मुख्यालय से सटे हुड़ेती गांव के 38 वर्षीय अनिल कुमार अच्छे काष्ठशिल्पी हैं। वह लगभग 18 वर्षों से अपने पांच-छह सहयोगियों के साथ देश की प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के मॉडल बना रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने नारायण आश्रम, मोस्टामानू, थलकेदार के मॉडल बनाए। कुछ समय पूर्व उनकी टीम ने उत्तराखंड के चारधाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री धाम) का मॉडल बनाया। उनके इस चारधाम मॉडल ने लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इस मॉडल की सराहना कर चुके हैं। अनिल का बनाया चारधाम का एक मॉडल राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय की शोभा बढ़ा रहा है। अनिल अपने साथियों के साथ मिलकर हर साल आधा दर्जन से अधिक कलाकृतियां तैयार करते हैं। इस वर्ष भी उन्होंने चार धाम के दो मॉडल सहित अलग-अलग पांच मॉडल बनाए हैं, जिन्हें बिक्री के लिए दिल्ली भेजा गया है।
अपने दादा से सीखा काष्ठकला का हुनर
पिथौरागढ़। अनिल ने बताया कि उनको लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर धार्मिक स्थलों के मॉडल बनाने की प्रेरणा अपने दादा स्व. गंभीर राम से मिली। अनिल का कहना है कि एक चार मॉडल बनाने में तीन माह का समय लगता है। इस मॉडल को तैयार करने में वे तुन, शीशम, साल, चीड़ की लकड़ी का प्रयोग करते हैं। लकड़ी का बुरादा भी इसमें प्रयुक्त होता है। अनिल का मुख्य उद्देश्य इस काष्ठकला के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि रोजगार के लिए पलायन करने के बजाय यहां के युवा इस तरह की कलाकृतियां बनाकर स्वरोजगार कर सकें।