फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अपराजिताओं ने युवा क्रांतिकारी सुनीति चौधरी और शांति घोष को याद किया

विज्ञापन
पिथौरागढ़ निखिलेश्वर एकेडमी में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
पिथौरागढ़। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत निखिलेश्वर चिल्ड्रंस एकेडमी में कार्यक्रम किया गया। इसमें अपराजिताओं ने युवा क्रांतिकारी सुनीति चौधरी और शांति घोष को याद किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बालिकाओं को स्वयं को पहचाना होगा।
विज्ञापन

शुक्रवार को अपराजिता कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य ममता सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि बेटी जब दृढ़ निश्चय कर लेती है तो वह मलाला यूसुफजई बन जाती है।
सामाजिक चिंतक डॉ. तारा सिंह ने कहा कि देश की आजादी के लिए 24 दिसंबर 1931 को बंगाल में अत्याचारी कलक्टर स्टीवेंस को उसी के निवास पर सबसे कम आयु की क्रांतिकारी सुनीति चौधरी (14) और शांति घोष (15) ने मौत के घाट उतार दिया था।
विज्ञापन

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में रानी लक्ष्मी बाई, जीनत महल के प्रत्यक्ष योगदान के पश्चात इन बीर बालिकाओं ने ही आजादी के समर में अपनी आहुति दी थी। इन वीरांगनाओं का राष्ट्र प्रेम और बलिदान लक्ष्य के प्रति संपूर्ण युवा बालिकाओं के लिए निसंदेह अनुकरणीय है।
समाज में लड़कियों को किसी से कम नहीं समझना चाहिए। वो भी पुरुष की तरह कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ सकती हैं। - दीक्षा जोशी, छात्रा
समाज में आज भी महिलाओं पर अत्याचार होते हैं। जो इस बात का संकेत है कि समाज में आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं है। - सोनम, छात्रा
बेटियों को अक्सर कमजोर माना जाता है। महिला दिवस, बालिका दिवस मनाकर उन्हें आगे बढ़ाने की बात होती है मगर उन पर अत्याचार कम नहीं होते हैं। - मोनिका, छात्रा
पुरुष को इस बात को समझना होगा कि बेटियां भी उनके बराबर है। कई जगह-जगह उनकी इच्छा के विरोध बेटियों की शादी का उनके सपनों को तोड़ा जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। - संजना, छात्रा

पिथौरागढ़ निखिलेश्वर एकेडमी में बोलते अतिथि। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : PITHORAGARH

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें