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दारमा घाटी की बंद सड़क को खोलकर राशन पहुंचाए प्रशासन

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गणाई गंगोली जीआईसी में आयोजित विभिन्न क्रियाकलापों में शामिल बालिकाएं और शिक्षिकाएं। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। भारी हिमपात के कारण विशाल ग्लेशियर बनने से दारमा की सड़क पिछले तीन माह से बंद है। दारमा के लोग शीघ्र ही माइग्रेशन पर अपने मूल गांवों को लौटेंगे। सड़क बंद होने से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। माइग्रेशन को देखते हुए लोगों ने प्रशासन से हिमखंडों को हटाकर सड़क खोलने और वहां पर राशन की आपूर्ति करने की मांग की है।
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बता दें कि दारमा घाटी के 14 गांव के लोग 6 माह के लिए माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी गांवों में जाते हैं। ग्रामीण इस दौरान खेतीबाड़ी, जड़ी बूटियों का दोहन और होम स्टे चलाकर अपनी जीविका चलाते हैं। पिछले साल माइग्रेशन के समय बरसात के कारण तवाघाट से सोबला और सोबला-ढाकर सड़क कई जगहों पर बंद हो गई थी। सड़क बंद होने के कारण सही समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने से दो लोगों की मौत भी हुई थी। अप्रैल से होने वाले माइग्रेशन को देखते हुए दिलिंग दारमा सेवा समिति के संरक्षक डॉ. प्रेम नगन्याल और कार्यवाहक महासचिव दिनेश चलाल के नेतृत्व में दारमा घाटी के 14 गांवों के प्रधानों ने दारमा सड़क को शीघ्र खोलने की मांग को लेकर शुक्रवार को एसडीएम के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा। महासचिव दिनेश चलाल ने पिछले साल की परेशानियों को देखते हुए प्रशासन से कार्यदायी संस्था को सोबला से ऊपर अतिरिक्त डीजल पहुंचाने के लिए निर्देशित करने की मांग भी उठाई, जिससे सड़क खोलने के दौरान मशीनों का संचालन बंद न हो।
बोंगलिंग निवासी कुंवर सिंह ने बताया कि वर्तमान में सोबला से वुर्थींग तक सड़क खुली है। वुर्थींग से आगे लगभग 20 किलोमीटर सड़क बंद है। उन्होंने कहा कि गर्मी शुरू होते ही सीमांत के लोग माइग्रेशन की तैयारियां करने लगे हैं, लेकिन सड़क बंद होने से आवाजाही करना बेहद कठिन है। इसे देखते हुए उन्होंने शीघ्र सड़क खोलने की मांग उठाई। सीमांत के लोगों ने ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्य सचिव, आपदा सचिव, सीपीडब्ल्यूडी को भी भेजी है।
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ज्ञापन देने वाले में ग्राम प्रधान जमन दताल, शांति सीपाल, सुनीता, बिंद्रा देवी, ममता नगन्याल, सरस्वती देवी, भगवती बनग्याल, सरिता देवी, सपना आदि रहे।
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