गोरखा शासनकाल में 1791 में बने पिथौरागढ़ के जिस किले का नाम बाद में लंदन फोर्ट रखा गया था, उसका नाम बदलकर अब सोरगढ़ रखने की मांग उठी है। यहां हुई बैठक में इस आशय का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया गया है। शासन से जिला गठन की तिथि 24 फरवरी से पहले इसका नाम बदलने का आग्रह किया गया है। यह भी कहा गया कि अब सभी दस्तावेजों में लंदन फोर्ट की जगह सोरगढ़ अंकित किया जाएगा।
श्रीरामलीला प्रबंधकारिणी समिति के आह्वान पर बुलाई गई बैठक में लोगों ने कई तर्क दिए। लंदन फोर्ट नाम को गुलामी का प्रतीक बताया गया। रामलीला समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि गोरखा शासन में बने इस किले में कई वर्षों तक पिथौरागढ़ तहसील का कार्यालय संचालित हुआ। बाद में इस किले के सुंदरीकरण के लिए शासन से धन मंजूर हुआ। अब यह बेहतरीन स्थल बनने वाला है लेकिन सरकारी दस्तावेजों में किले का नाम लंदन फोर्ट ही रखा गया है। इसे समय के हिसाब से बदला जाए। जब कई महानगरों के नाम तक समय के हिसाब से बदल दिए गए हैं तो किले का नाम बदलने में भी किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सभी लोग इस बात से सहमत हैं कि किले का नाम बदला जाए।
तय हुआ कि जल्द ही इस किले के इतिहास पर पुस्तिका प्रकाशित की जाएगी। बैठक में प्रो. लछीलाल वर्मा, डॉ. परमानंद चौबे, डॉ. दीप चौधरी, डॉ. अशोक पंत, डॉ. ललित पंत, डॉ. आरपी पाठक आदि ने किले के संबंध में कई ऐतिहासिक तथ्य बताए। बैठक में शिवराज सिंह अधिकारी, उमेश जोशी, दीपक नगरकोटी, नवीन भट्ट, राजेंद्र लाल वर्मा, कल्लू वाल्मीकि, राकेश साह, प्रमोद पाटनी आदि थे।
गोरखा किला परिसर से 2015 में शिफ्ट हो गई तहसील
पिथौरागढ़। गोरखा किला परिसर से पिथौरागढ़ तहसील का कार्यालय 2015 में कलक्ट्रेट के पास स्थित वन पंचायत के भवन में शिफ्ट हो गया था। तहसील के नए भवन का निर्माण कार्य नगरपालिका के पास हो रहा है। गोरखा किले का सुंदरीकरण हो जाने के बाद पर्यटन निदेशालय ही तय करेगा कि इसे किसे हस्तांतरित किया जाए। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। अभी सुंदरीकरण का काम पूरा नहीं हुआ है।
गोरखा शासनकाल में किला बना था
पिथौरागढ़। इतिहासकार डॉ. दीप चौधरी के अनुसार 1935 में पिथौरागढ़ के इस किले में तहसील कार्यालय खोला गया था। उससे पहले तहसील कार्यालय बजेटी में था। इस किले को गोरखा शासनकाल में बनाया गया था। वर्ष 1815 में गोरखा शासन का अंत हुआ। वर्ष 1840 में किले का नाम लंदन फोर्ट रख दिया गया। उनके अनुसार यह किला ढाई मंजिली मीनार की तरह था। शत्रु पर नजर रखने के लिए इसमें सुराख बने हैं। अब इस किले को नए रूप में विकसित किया जा रहा है।