निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर झूलाघाट से तालेश्वर तक के हिस्से में इन दिनों कड़ाके की ठंड में डामरीकरण किया जा रहा है। इस क्षेत्र में इन दिनों तापमान शून्य से 15 डिग्री के बीच रह रहा है। मानक के हिसाब से डामरीकरण के लिए 20 डिग्री से अधिक तापमान होना जरूरी है। ठंड के मौसम में किए जा रहे डामरीकरण पर लोग एतराज जता रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
झूलाघाट-तालेश्वर तक सड़क अवशेष कार्य पर निमार्ण कार्य 21 दिसंबर 2015 से शुरू हुआ था। मानकों के हिसाब से सड़क को मार्च 2017 में ही पूरा होना था, लेकिन इसमें कई जगहों पर पहाड़ियों का कटान नहीं हो पाया है। तीन-चार जगहों पर स्कवर, कॉजवे का निर्माण होना है। इस बीच सुरक्षा दीवार बनाए बिना ठेकेदार ने डामरीकरण का काम शुरू कर दिया है। सड़क के किनारे सीमेंट की नाली के स्थान पर जेसीबी से खोदी गई नाली को ही बनाया जा रहा है। करीब 2.94 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे काम की गुणवत्ता को देखने के लिए मौके पर कोई भी अधिकारी तक मौजूद नहीं है।
विश्व बैंक निर्माण खंड अस्कोट द्वारा बनाई जा रही इस सड़क के निर्माण में योगमा इंजीनियरिंग कंपनी कंसलटेंसी का कार्य कर रही है। उत्तर प्रदेश की अनुपम कंस्ट्रक्शन कंपनी सड़क निर्माण कर रही है। इसमें 50 किमी दूर नाकोट से घाटी वाले स्थान पर लाकर देर रात तक हो रहे डामरीकरण पर क्षेत्र के लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश है। लोगों का कहना है कि मौके पर विभाग के किसी भी अधिकारी के मौजूद न होने से निर्माण कार्य में मनमानी की जा रही है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर धूप न होने से सड़क में किया गया डामर पैर से रगड़ने पर ही निकल जा रहा है।
अनुपम कंस्ट्रक्शन के परियोजना प्रबंधक महेश चौधरी का कहना है कि सड़क से संबंधित सभी काम अब पूरे हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि 50 किमी दूर से लाने पर भी डामर का तापमान कम नहीं होगा। विश्व बैंक निर्माण खंड के एसडीओ हरीश रजवार ने बताया कि डामर में केमिकल डलवाया जा रहा है। इससे माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में भी डामर किया जा सकता है। कहा कि सड़क की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है।