पिथौरागढ़। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलेभर में तीन फरवरी से पल्स एनीमिया कार्यक्रम शुरू होगा। जिले की 1690 गर्भवतियों की एनीमिया की जांच होगी। एनीमिया ग्रसित पाए जाने पर चिकित्सक के देखरेख में उनका उपचार किया जाएगा।
आयरन की कमी से एनीमिया होता है। बच्चे का समय से पहले जन्म होना एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों के लिए जोखिमभरा होता है। उनको इस बीमारी से गुजरना न पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग 10 फरवरी तक जिलेभर में पल्स एनीमिया अभियान चलाएगा। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षक धारचूला, मुनस्यारी, गंगोलीहाट, विण, बेड़ीनाग, कनालीछीना, मूनाकोट और डीडीहाट के 1690 गर्भवतियों की हिमोग्लोबिन की जांच करेंगे।
आयरन नहीं मिलने पर हो सकता है एनीमिया
पिथौरागढ़। शरीर हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन का उपयोग करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में एक प्रोटीन है। यह शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है। इसके साथ ही शरीर में आवश्यक आयरन की मात्रा भी बढ़ जाती है। शरीर बच्चे को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के लिए अधिक रक्त बनाने के लिए आयरन का उपयोग करता है। इस दौरान आयरन नहीं मिलने पर एनीमिया हो सकता है।
कोट
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। महिलाएं हीमोग्लोबिन की जांच जरूर कराएं। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ पिथौरागढ़।