फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंकों की हड़ताल से 150 करोड़ का नुकसान

विज्ञापन
पिथौरागढ़ में राष्ट्रीय बैंकों के अधिकारी और कर्मी प्रदर्शन करते हुए। - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल रही। बैंक कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। बैंकों के कर्मियों ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण से देश का काफी नुकसान होगा। सरकार की नीतियां जनता के हित में नहीं हैं। बैंकों की हड़ताल से पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में लगभग डेढ़ सौ करोड़ का लेनदेन ठप रहा।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के निजीकरण के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंक कर्मियों ने सिमलगैर बाजार में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की जनविरोधी बैंकिंग, आर्थिक नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण और उनमें विनिवेश फैसलों से आम जनता, किसानों, लघु बचतकर्ताओं, पेंशनभोगियों, छोटे-मध्यम आकार के उद्यमियों, व्यापारियों, स्वरोजगारी चलाने वाले, विद्यार्थियों, महिलाओं, पिछड़े वर्गों, बेरोजगारों और कर्मियों को नुकसान होगा।
बैंक का निजीकरण होगा तो ग्रामीण शाखाएं बंद हो जाएंगी। सार्वजनिक बचत के लिए अधिक जोखिम, लघु बचत योजनाओं पर ब्याज में कमी और सेवानिवृत्त, वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनभोगियों को दिक्कत होगी। इससे देश की 95फीसदी जनता को नुकसान उठाना पड़ेगा। इस अवसर पर क्षेत्रीय सचिव हरीश चंद्र पुनेठा, सहायक महासचिव अर्जुन सिंह बसेड़ा, दिनेश चंद्र, केदार भट्ट, संतोष सिंह, नवीन राम, गौतम, गोविंद सिंह बिष्ट, नवीन राम, गणेश रौतेला, गोपाल फिरामल समेत कई शामिल रहे।
विज्ञापन

बैंकों की हड़ताल से 150 करोड़ का नुकसान
पिथौरागढ़। राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल से चंपावत और पिथौरागढ़ जिले में 150 करोड़ का नुकसान हुआ। एसबीआई अधिकारी एसोसिएशन के सहायक महासचिव अर्जुन सिंह बसेड़ा ने बताया 50 करोड़ का क्लियरिंग और 100 करोड़ के अन्य कार्य प्रभावित रहे। जिला समेत आठ विकासखंडों में नौ नेशनल बैंकों की यूनियनों की हड़ताल से 30 से अधिक बैंक शाखाओं में काम प्रभावित रहा।
बैंकों की हड़ताल से आम लोगों को भी हुई दिक्कत
पिथौरागढ़। राष्ट्रीयकृत बैंकों की हड़ताल के चलते पिथौरागढ़ जिले में ग्राहकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बैंकों की हड़ताल से अधिकांश एटीएम के शटर भी गिरे रहे। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदारी के लिए शहरों में आए ग्राहकों को बिना काम के ही वापस जाना पड़ा। विजय सिंह ने बताया कि वह एसबीआई में पैसे जमा करने आए थे। मगर बैंक की हड़ताल के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। बैंकों ही हड़ताल से लेनदेन पूरी तरह ठप रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें