पहाड़ों पर तबाही का हादसा कितना भयावह था, उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चैनलों और नेट पर उसकी तस्वीरें देखकर लोग अवसाद में जा रहे हैं।
इनमें सबसे अधिक संख्या युवाओं की है। उनका कहना है कि वे रात-रात भर सो नहीं पाते। झपकी लगी तो ख्वाब में जल प्रलय नजर आता है। दिलो-दिमाग की कैफियत अजीब रहती है।
मुफ्त काउंसलिंग
परी फाउंडेशन अवसाद में आए ऐसे लोगों की मुफ्त काउंसलिंग कर रही है। लोग अपनी समस्याएं फोन पर बता रहे हैं या ई-मेल कर दे रहे हैं। फाउंडेशन की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सोना कौशल ने बताया कि हादसे की तस्वीरें देखने या उसके बारे में सोचने से पोस्ट ट्रोमेटिक स्ट्रेस डिस्आर्डर (पीटीएसडी) की शिकायत हो जाती है।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
डा. सोना ने बताया कि युवाओं के फोन उनके पास अधिक आ रहे हैं। वे आपदाग्रस्त क्षेत्रों में जाकर सेवा करने की इच्छा भी जाहिर करते हैं, लेकिन हादसे से अवसाद में हैं।
उन्होंने बताया कि काउंसलिंग की एक-दो सिटिंग में रोगियों को राहत मिल जाती है। किसी काम में मन न लगना, नींद न आना, सपने में डरावने दृश्य पीटीएसडी के लक्षण हैं।