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उत्तराखंडः नहीं किया मदद का इंतजार, खुद बचाया बांज का जंगल

Tue, 03 May 2016 03:03 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, अल्मोड़ा
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fire - फोटो : Amar Ujala
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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में ग्रामीणों की कड़ी मेहनत, एनडीआरएफ, होमगार्ड्स के जवानों और प्रशासन के अधिकारियों के सार्थक प्रयास से करीब 30 घंटे बाद आटी वन पंचायत के चार हेक्टेयर बांज के जंगल में लगी आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि करीब 30 हेक्टेयर वन संपदा को आग ने बर्बाद कर दिया है।
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भनोली तहसील के दन्यां क्षेत्र में आटी, सुकना, बेलक वन पंचायतों के 400 हेक्टयर से अधिक जंगल बांज, काफल आदि चौड़ीपत्ती प्रजाति के जंगल हैं। रविवार को पूर्वाह्न करीब 11 बजे बेलक गांव की सरहद से उठी आग की चिंगारी से जंगल जल उठा। वन पंचायत सरपंच गिरीश जोशी अन्य ग्रामीणों को लेकर आग बुझाने मौके पर पहुंचे।

विकाराल होती आग पर काबू पाने में असफल होता देख उन्होंने जिलाधिकारी सविन बंसल को फोन पर सूचना दी। डीएम के निर्देश पर एनडीआरएफ के जवान मौके पर पहुंचे, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका। ग्रामीण रात भर आग बुझाने में जुटे रहे। सोमवार सुबह फिर से आग भड़क उठी।
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आग बुझ जाने पर ली राहत की सांस

आग की सबसे ज्यादा आशंका चीड़ के जंगलों में होती है। चीड़ के जंगल ही हिमाचल में करीब 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर में फैले हैं। प्रदेश को आग लगने के लिहाज से अति संवेदनशील, मध्यम संवेदनशील और संवेदनशील की श्रेणी में रखा है। करीब साढ़े तीन सौ बीट ऐसी हैं जिन्हें अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रखा है जबकि 1020 को लो सेंसटिविटी और 667 को मीडियम सेंससिटिविटी जोन में रखा है। - फोटो : अमर उजाला
सूचना पाकर भनोली के एसडीएम एनएस नगन्याल, नायब तहसीलदार एनएस जीना, राजस्व निरीक्षण दीप तिवारी, छह होमगार्डों के जवानों और एनडीआरएफ के जवानों को लेकर मौके पर पहुंचे।

भारी संख्या में आटी गांव की महिलाएं और बेलक के पुरुष, रेंजर मनोज सनवाल, उद्यान कर्मी दीवान सिंह, हेम जोशी आदि भी जंगल पहुंचकर आग बुझाने में जुट गए। शाम को करीब 4:30 बजे आग पर काबू पा लिया। जंगल की आग बुझ जाने पर विशेष रूप से महिलाओं ने राहत की सांस ली।

आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक शीतलाखेत और कनारीछीना रेंज के जंगलों में अब भी आग लगी है। आग बुझाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन कर्मी और अस्थायी वाचर मौके पर लगे हैं।

डीएम ने बताया कि आग बुझाने को जिले में एनडीआरएफ के 40, एसडीआरएफ के 28 जवानों के अलाख 257 वन, 22 पुलिस और फायर कर्मी, 100 होमगार्ड के अलावा 98 स्थानीय फायर वाचरों को लगाया गया है। इस काम के लिए 26 छोटे, एक पानी के टैंकर और दो फायर वाहनों की भी सहायता ली जा रही है।
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