नगर निगम श्रीनगर में लेखाधिकारी की नियुक्ति के बाद गत जनवरी माह से अटके निकाय कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और पेट्रोल-डीजल के बिल पास हो गए हैं।
यहां बता दें कि 31 दिसंबर 2021 को शासन ने नगर पालिका श्रीनगर को उच्चीकृत कर नगर निगम का दर्जा दे दिया था। इसके बाद 3 जनवरी 2022 को प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई, लेकिन पालिकाध्यक्ष पूनम तिवाड़ी इसके खिलाफ हाईकोर्ट चली गई। 13 जनवरी को हाईकोर्ट ने आदेश जारी करते हुए नगर पालिका बोर्ड को बहाल कर दिया। लेकिन आहरण-वितरण अधिकारी नियुक्त न होने की वजह से वेतन भत्ते और बिलों के भुगतान रुक गए। इससे नाराज कर्मचारी 22 फरवरी से कार्य बहिष्कार पर चले गए।
शासन ने 23 फरवरी को डीएम पौड़ी को पत्र भेजते हुए स्पष्ट किया गया है कि श्रीनगर को नगर निगम में उच्चीकृत करने संबंधी 31 दिसंबर की अधिसूचना, नगर निगम मेें प्रशासक व नगर आयुक्त की नियुक्ति के आदेशों के संबंध में हाईकोर्ट ने कोई प्रतिकूल आदेश नहीं दिया है। इसलिए डीएम अपने स्तर पर कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और डीजल-पेट्रोल के बिलों का भुगतान करने हेतु नगर आयुक्त को निर्देशित करें।
शासन से पत्र मिलने के बाद 24 फरवरी की शाम डीएम डॉ. विजय जोगदंडे ने नगर आयुक्त/एसडीएम को उक्त कार्रवाई के निर्देश दिए। नगर आयुक्त अजयवीर सिंह के अनुरोध पर डीएम ने 25 फरवरी को आदेश जारी करते हुए वित्तीय संबंधी कार्यों के लिए उप कोषाधिकारी (एटीओ) नंदन सिंह खत्री को लेखाधिकारी की जिम्मेदारी दे दी। आदेश मिलने के बाद 26 फरवरी को एटीओ खत्री ने जनवरी माह के लंबित बिल और वेतन-पेंशन भुगतान संबंधी प्रकरण निपटाए।