नगर पालिका क्षेत्र में संचालित हो रही आईटीआई के लिए 31 वर्ष बाद भी भवन नहीं बन पाया है। किराए के भवन में संचालित हो रही आईटीआई का भवन 11 मई को आपदा से ध्वस्त होने से इस वर्ष भी छात्र प्रवेश नहीं ले पाए हैं, जबकि यहां तैनात कर्मियों को मुनिकीरेती अटैच कर दिया गया है।
वर्ष 1992 में क्षेत्रीय जनता के आंदोलन के बाद सरकार ने देवप्रयाग में आईटीआई की स्थापना की थी। वर्ष 2002 में तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने आईटीआई को पालिका के बहुउद्देश्य भवन में शिफ्ट करवाया। 11 मई की आपदा में तीन मंजिला बहुउद्देश्य भवन ध्वस्त होने से लाखों के उपकरण भी बह गए। 12 मई को तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, डा. धन सिंह रावत ने आपदा प्रभावित इलाके का भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी टिहरी को आईटीआई भवन के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध होने तक किराये के भवन में आईटीआई संचालन के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई। जिससे वर्ष 2021 शून्य सत्र रहा, जबकि आधे स्टाफ का तबादला कर दिया गया। शेष कर्मियों को भवन उपलब्ध होने तक आईटीआई मुनिकीरेती में उपस्थिति दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
- नगर के पास भ्वींट गांव में आईटीआई भवन के लिए 0.500 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध हो चुकी है, जिसका संयुक्त निरीक्षण किया गया है। भूगर्भीय रिपोर्ट आने के बाद कार्यदायी एजेंसी का चयन कर डीपीआर तैयार की जाएगी। इसी वर्ष भवन निर्माण और कक्षाओं का संचालन शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। भवन न होने से अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा भी आईटीआई देहरादून में करवाई जाएगी।
-प्रधानाचार्य शैलेंद्र शर्मा, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान देवप्रयाग।