विकास खंड कीर्तिनगर के नैथाणा और लक्ष्मोली गांव में रेल परियोजना के निर्माण ने लोगों से स्थानीय सब्जियों का स्वाद छीन लिया है। आरवीएनएल की ओर से इन दोनों गांवों में करीब चार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि रेल परियोजना के निर्माण के लिए अधिग्रहीत की गई है, जिससे सब्जी उत्पादन पर निर्भर कई लोगों के समक्ष रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
नैथाणा और लक्ष्मोली गांव में बड़े पैमाने पर राई, मूली, पालक, मटर, भिड्डी, बीनस आदि सब्जी का उत्पादन किया जाता था, जिस पर कई परिवारों की रोजी रोटी निर्भर थी। यहां की सब्जी की श्रीनगर व कीर्तिनगर बाजार सहित बडियारगढ़, बागवान आदि कई क्षेत्रों में बड़ी मांग रही। गांव के कई लोग स्वयं अन्य लोगों से सब्जी खरीदकर बाजार और अन्य जगहों पर पहुंचाते थे। नैथाणा गांव के विनोद सिंह चौहान बताते हैं कि उनके गांव में अवतार सिंह चौहान, मंगल सिंह नेगी, जयपाल सिंह, शिव सिंह, सत्ये सिंह, रमेश रावत, बलदेव सिंह, प्रताप सिंह, राजेंद्र सिंह, रेवत सिंह, रामचरण, सूरजीत सिंह व भरत सिंह सहित करीब 40 से अधिक परिवार सालभर सब्जी उत्पादन करते थे, जिससे परिवार का भरण-पोषण होता था। लेकिन अब अधिकतर कृषि भूमि रेल परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई है, जो शेष भूमि है उस पर धूल मिट्टी के कारण सब्जी का उत्पादन करना मुश्किल हो चुका है।
वहीं लक्ष्मोली गांव के पूर्व प्रधान सुरेश सिंह नेगी ने बताया कि उनके गांव में अधिकतर परिवार सब्जी उत्पादन पर निर्भर थे। जब से रेल परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ कई परिवारों के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। संवाद
-नैथाणा गांव में लोग साल भर सब्जी उत्पादन करते थे, जिससे प्रत्येक परिवार की हर दिन कम से कम दो से तीन सौ तक की आमदनी होती थी। लेकिन रेल परियोजना के निर्माण से सब कुछ समाप्त हो गया है। -विनोद सिंह चौहान, ग्राम नैथाणा
-रेल परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि के आस पास शेष भूमि पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे लावारिस पशु और परियोजना के डंपिंग जोन व निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल से खेती चौपट हो रही है। -उत्तम सिंह चौहान, ग्राम नैथाणा।
-परियोजना की कार्यदायी एजेंसी ने बची शेष भूमि पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए हैं। सिंचाई गूल क्षतिग्रस्त है, जब तक परियोजना का निर्माण पूरा नहीं हो जाता काश्तकारों को क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाना चाहिए। -जमन सिंह कठैत, ग्राम नैथाणा।
-अभी कुछ लोगों को अधिग्रहीत की गई भूमि का भुगतान नहीं हो पाया है, जिससे कई जगहों पर घेरबाड़ छोड़ी गई है। धूल मिट्टी की समस्या के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है। अगर कोई अन्य समस्या होगी, तो उस पर भी ध्यान दिया जाएगा। -पीपी बडोगा, वरिष्ठ उप महाप्रबंधक आरवीएनएल