प्रशासन की लापरवाही से शहर में दोबारा अतिक्रमण होने लगा है। एक साल प्रशासन की संयुक्त टीम ने जहां अतिक्रमण ढहाया था, वहां दोबारा से निर्माण कार्य हो रहा है। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने के लिए जिन लोगों को 10 दिन की मोहलत दी गई थी, उन्होंने अधूरे छूटे काम भी पूरे करा लिए। खास बात यह है कि शहर में अतिक्रमण मुख्य मार्गों पर हो रहा है। जहां मंत्रियों से लेकर अधिकारियों के दौरे लगते रहते हैं।
दिसंबर 2020 में तहसील प्रशासन, नगर पालिका, पुलिस और पीडब्लूडी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड की संयुक्त टीम ने धोबीघाट, श्रीकोट, घसिया महादेव, भक्तियाना उफल्डा और बाजार क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था। लगभग एक हफ्ते तक चले अभियान में अवैध कच्चे और निर्माणाधीन भवनों के ढांचे ढहाए गए थे। अभियान के तहत नगर पालिका और हाईवे की भूमि से अतिक्रमण हटाया गया था।
कुछ लोगों के अनुरोध पर उनको अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया गया था, लेकिन प्रशासन की यह कार्रवाई खानापूर्ति ही साबित हुई। कमल रावत का कहना है कि प्रशासन ने जहां अवैध निर्माण ध्वस्त किए थे, वह दोबारा मकान खड़े हो गए हैं। गदेरों और सड़क किनारे पिलर खड़े कर भवन बनाए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बिजली के पोल व स्ट्रीट लाइट घरों की दीवार के अंदर कैद हो गए हैं। जिन लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे, उन्होंने पूरा ही कब्जा कर दिया है। डीएम डॉ. विजय जोगदंडे का कहना है कि अतिक्रमण मामले को दोबारा से दिखवाया जाएगा। यदि अतिक्रमण हो रहा होगा, तो हटवाया जाएगा।