उप कोषागार श्रीनगर में गबन का आरोपी लेखाकार पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया। पुलिस ने आरोपी के घर में दबिश दी थी, लेकिन वह घर में नहीं मिला। आरोपी के मोबाइल फोन नंबर भी स्विच ऑफ चल रहे हैं। वहीं, मुख्य कोषाधिकारी ने भी उप कोषागार पहुंच कर मामले से संबंधित तथ्य जुटाए।
गत 10 जनवरी को उप कोषाधिकारी नंदन सिंह खत्री ने कोतवाली में लेखाकार सुभाष चंद्र के खिलाफ गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उप कोषागार के दो कर्मचारियों ने साढ़े 38 लाख रुपये के गबन का आरोप है। दोनों आरोपियों ने वर्ष 2016 से 19 के बीच 75 मृतकों को जीवित दिखाकर उनको मिलने वाली पेंशन राशि अपने बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। एक आरोपी सहायक लेखाकार हरि दर्शन बिष्ट की एक साल पूर्व मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा आरोपी लेखाकर सुभाष चंद्र 7 जनवरी से ऑफिस नहीं आया है।
मामले मेें डीएम की ओर से कमेटी भी गठित की है। बीते दिन कमेटी के सदस्य मुख्य कोषाधिकारी जगदीश चंद्रा ने भी उप कोषागार पहुंच कर उप कोषाधिकारी से गबन संबंधी जानकारी ली। साथ ही पेंशन संबंधी रिकार्ड तलब किए। इधर, मामले की विवेचना कर रहे एसएसआई रणवीर रमोला ने बताया कि आरोपी सुभाष को पकड़ने के लिए घर सहित अन्य स्थानों में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। उसका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है, जिससे लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि सुभाष ने अपने दो बैंक खातों में गबन की गई रकम ट्रांसफर की। एक बैंक खाते में उसने 16 लाख 42 हजार 295 रुपये और दूसरे खाते में 92 हजार 129 रुपये ट्रांसफर किए हैं।