चुनावों में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। युवा जहां चुनाव प्रचार की कमान थामते हैं, वहीं सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन अकसर युवाओं के मुद्दे गौण रह जाते हैं। जबकि युवा रोजगार की ठोस नीति, रोजगारपरक शिक्षा और पलायन का ठोस समाधान चाहते हैं। युवाओं का यह भी कहना है कि राजनैतिक दल सिर्फ शहरों में ही, बल्कि गांवों की समस्याओं पर ध्यान दें। युवाओं के मन मेें क्या चल रहा है, इसको जानने का प्रयास किया गया है।
-यहां रोजगार की बहुत कम संभावनाएं है। रोजगार के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। यदि रोजगार मिलती भी है, तो सैलरी काफी कम होती है। सीखने को भी नहीं मिलता है। शिक्षा ग्रहण करने के बाद रोजगार हासिल करना बाहर जाना मजबूरी है। पलायन की यही एकमात्र वजह है। पहाड़ में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। -आयुष्मान, निजी क्षेत्र में सेवारत श्रीनगर
-आज का युवा चाहता है कि युवा रोजगार गारंटी शिक्षा, दुर्गम इलाकों में अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था, बेहतर परिवहन संपर्क मार्ग, पर्यटन स्थलों का सही रखरखाव और चुनाव में विजयी प्रत्याशी वादों को पूरा करेें। -शिवम नेगी, छात्र श्रीनगर
-चुनाव के मुद्दे मूलभूत आवश्यकताओं से परिपूर्ण होने चाहिए। शहरों में ही नहीं बल्कि दूर दराज के क्षेत्रों में भी बिजली, पानी, शिक्षा, रोजगार, संतुलित पौष्टिक भोजन, गैस सिलिंडर, राशन, महंगाई से छुटकारा, पेट्रोल के कम दाम, वाहनों के किराये में कमी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। -वैशाली रावत, छात्रा गढ़वाल विवि श्रीनगर
-पहाड़ में शिक्षा ग्रहण करना बड़ी चुनौती है। उच्च शिक्षा के लिए मैदानी क्षेत्रों की ओर जाना पड़ता है। कॉलेज तक की पढ़ाई के लिए गांवों से शहर जाना पड़ता है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले युवा चाहते हैं कि उनके इलाके में बेहतर शिक्षा व्यवस्था हो जाए और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए मौके मिल जाएं। -शिवानी उनियाल, छात्रा श्रीनगर