श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज से उत्तीर्ण एक डॉक्टर को बांड धनराशि जमा करने पर उसको बांडमुक्त कर दिया है। संस्थान ने उक्त डॉक्टर को उसके समस्त अभिलेख सौंप दिए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज से सब्सिडी फीस पर एमबीबीएस करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रदेश के दुर्गम सरकारी अस्पतालों में सेवा करने का बांड भरना होता है। बांड की शर्त तोड़ने पर उनको चक्रवृद्धि ब्याज सहित फीस की राशि लौटानी पड़ती है। बांड की शर्त के अनुसार चिकित्सा सेवा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से यहां से उत्तीर्ण डॉक्टर अस्पतालों में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन विभाग और मेडिकल कॉलेज को लगभग डेढ़ सौ बांडेड चिकित्सकों के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि वह कहां सेवा कर रहे हैं। जिस पर संस्थान ने संबंधित डॉक्टरों के पतों पर नोटिस भेजे। इसके बाद लगभग पांच डॉक्टरों ने बांड के अनुसार धनराशि जमा करा दी। सोमवार को एक और डॉक्टर मीना ने भी बांड की धनराशि लगभग साढ़े 11 लाख रुपये जमा करा दिए। प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि डॉक्टर का संस्थान में चयन अखिल भारतीय कोटे से हुआ था। धनराशि जमा कराने पर उसको उसके प्रमाण पत्र और अन्य कागजात दे दिए गए हैं।