फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बदरीनाथ का शीतकालीन पूजास्थल भी खतरे में

Sat, 29 Jun 2013 03:50 PM IST
विजयलक्ष्मी भट्ट
विज्ञापन
विज्ञापन
बदरीनाथ धाम पर ही नहीं, बल्कि शीतकालीन पूजास्थल पांडुकेश्वर पर भी खतरा मंडरा रह है। हाल में आए जलप्रलय ने गांव के निचले हिस्से में बड़ी मात्रा में भू-कटाव किया है, जिसके चलते यहां भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
विज्ञापन


यदि अलकनंदा ने अपना रास्ता बदला तो इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थान का नक्शा ही बदल जाएगा। पांडुकेश्वर जोशीमठ और बदरीनाथ के बीच स्थित है।

खतरा अभी टला नहीं
यहां के योगध्यान मंदिर में भगवान बदरीनाथ की शीतकालीन पूजा की जाती है। दिल्ली -माणा राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे इस पौराणिक स्थान में 17 जून को अलकनंदा नदी ने बड़ी तबाही मचाई।

राजमार्ग से लगे गांव में एक तीन मंजिला लॉज, तीन आवासीय भवन और दो प्राइवेट कंपनियों के हेलीपैड, एक हेलीकॉप्टर, एक प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी चौकी और कई हेक्टेयर कृषि भूमि भी नदी में समा गया है।
विज्ञापन


इसके अलावा पांडुके श्वर गांव के नीचे बड़ी मात्रा में भू-कटाव हो रहा है, जिससे कई आवासीय मकानों को खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में गांव में रहने वाले पांच सौ परिवार खतरे के साये में जीवन यापन कर रहे हैं।

अलकनंदा मचा सकती है फिर से तबाही
वर्तमान में अलकनंदा नदी गांव के बांई ओर बह रही है। गांव के ठीक नीचे नदी घुमाव आकर लिए हुए है। बरसात में यदि नदी में तेज बहाव आया और नदी सीधे पांडुकेश्वर गांव की ओर मुड़ी तो बड़ी तबाही हो सकती है। वहीं लामबगड़ बैराज से भी अधिक पानी छोड़ा गया, तो पूरा पांडुकेश्वर तबाह हो सकता है।

पांडुकेश्वर का महत्व पौराणिक
यह स्थान ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व का है। बताया जाता है कि यहां राजा पांडु ने तप किया था। इसीलिए इस स्थान का नाम पांडुकेश्वर पड़ा। इसके अलावा यहां भगवान बदरीनाथ की शीतकालीन पूजा भी की जाती है।

बदरीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के बाद उद्धव और कुबेर के चलविग्रह को यहां के योगध्यान मंदिर में प्रतिष्ठित किया जाता है। पांडुकेश्वर में पांच बदरियों में एक योगध्यान बदरी का भी मंदिर है।

बदरीनाथ के हकहकूक धारियों का गांव है यह
पांडुकेश्वर के ग्रामीण बदरीनाथ मंदिर से जुड़े हुए हैं और यहां की पूजा व्यवस्था में सहयोग देते हैं। यहां के भंडारी, मेहता जाति के लोग मंदिर के हक-हकूकधारी हैं। इस गांव के लोग छह माह तक बदरीनाथ के निकट बामणी गांव में रहते हैं और छह माह तक पांडुकेश्वर में। पूर्व में बदरीनाथ मंदिर के रावल भी यहीं निवास करते थे।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें