साबिर पाक की मुकद्दस जमीं कलियर पर एक बार फिर अकीदत का नजराना लेकर 170 पाकिस्तानी जायरीन मंगलवार को पहुंच गए। हर साल पाकिस्तान से जत्था यहां सालाना उर्स में शिरकत करने आता है। बीते दिनों सरहद पर भारतीय फौजियों की हत्या और सिर काटने के बाद पैदा हुए तनाव और विवाद के बाद हालात बदले-बदले हैं।
अमूमन पाक अकीदतमंदों के लिए यहां खुलकर पलक पांवड़े बिछाए जाते थे। इस बार भी इस्तकबाल हुआ मगर जबरदस्त घेराबंदी और निगहबानी के बीच। पाक जायरीन यहां आकर बेहद खुश हैं। हिंदुस्तान की तहजीब से भी और अपनी आवभगत से भी। भारत का शुक्रिया अदा करते नहीं थकते। सभी एक सुर में कहते हैं कि दोनों मुल्कों के बीच नफरत की दीवार गिराकर अमन और भाईचारगी कायम होनी चाहिए। यही दुआ वह पाक साबिर के दरबार में भी करेंगे।
कायम हो प्रेम और भाईचारा
अमर उजाला से बातचीत में जत्थे की अगुवाई कर रहे राशिद शमीम कहते हैं मेरी तो यही तमन्ना है कि दोनों मुल्क एक दूसरे की आवाम के जज्बातों के मद्देनजर आपसी रिश्ते मजबूत करने के लिए एक राह पर चलें। नफरत की खाई को मिटाकर दुनिया के सामने प्रेम और भाईचारा की मिसाल कायम करें।
जत्थे में शामिल मोहम्मद आजम फरमाते हैं पिरान कलियर अब तक कई बार आ चुका हूं। हिंदुस्तान में हमेशा इतना प्यार मिलता है कि उन्हें कभी पराए मुल्क का अहसास नहीं हुआ। दोनों देशों के रिश्ते बेहतर रहें तो अच्छा रहेगा।
बड़ी चतुराई से कलियर लाया गया जायरीनों को
हिंदूवादी संगठनों के विरोध की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने चतुराई दिखाई। जायरीनों को रुड़की में उतारने के बजाए उन्हें छह किलोमीटर पहले इकबालपुर रेलवे स्टेशन पर ही उतारने की योजना बनी थी। प्रशासन और पुलिस के कुछ आला अफसरों के अलावा अन्य को इसका पता नहीं था। दिखावे के लिए रुड़की स्टेशन पर तैयारियां की गईं। यहां जेएनयूआरएम की छह बसें, फायर ब्रिगेड, दंगा नियंत्रण वाहन आदि लगाए गए थे।
उधर, लाहौरी एक्सप्रेस सुबह 5.50 बजे इकबालपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पर कागजातों की पड़ताल आदि की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जायरीनों को पांच प्राइवेट और एक पुलिस की बस से इमली रोड, भगवानपुर होते हुए पिरान कलियर पहुंचा दिया गया। यहां उन्हें साबिर गेस्ट हाउस में ठहराया गया है।