दिल्ली गैंगरेप की शिकार बहादुर बिटिया की बेहतर करियर की ख्वाहिश भले ही अधूरी रह गई, लेकिन मरने के बाद भी वह दूसरी लड़कियों की उच्च शिक्षा में ‘मददगार’ बनेगी। बिटिया के परिजनों ने देहरादून के संस्थान की उसकी चार साल की फीस एक लाख 80 हजार रुपये लौटाने की पेशकश ठुकरा दी है। वह इस धन से दूसरी जरूरतमंद लड़कियों की सहायता देना चाहते हैं। उधर, संस्थान के प्रबंधकों ने बिटिया की याद में लड़कियों की उच्च शिक्षा के लिए स्कालरशिप शुरू करने की योजना बनाई है।
अपने साहस और संघर्ष से देशभर में महिला सुरक्षा की अलख जगाने वाली बहादुर बेटी दामिनी दून के एक संस्थान में पैरामेडिकल कोर्स में अंतिम वर्ष की छात्रा थी। परीक्षा देने के बाद वह इंटर्नशिप के लिए दिल्ली गई थी। उसकी इच्छा थी कि वह नौकरी करके मां-बाप का बोझ उठाए। लेकिन दिल्ली की दारुण घटना ने उसके सपनों को पूरा नहीं होने दिया।
संस्थान ने उसकी चार साल की पूरी फीस लौटाने की घोषणा की थी। लेकिन परिजन चाहते हैं कि इस राशि को कालेज कोष में जमा रखा जाए। इससे जरूरतमंद प्रतिभाशाली छात्राओं को हर साल कुछ निश्चित रकम दी जाए। इसकी घोषणा के लिए जल्द ही छात्रा के परिजन दून आएंगे। वे ही तय करेंगे कि छात्राओं को बतौर प्रोत्साहन कितनी रकम दी जाएगी।
बहादुर बेटी का परिवार दिलेर
दून स्थित संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी अरविंद सिंह का कहना है कि बहादुर बेटी का परिवार भी दिलेर है। हमने फीस लौटाने की बात कही, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने इस फीस को जरूरतमंद बेटियों के उत्साहवर्धन में प्रयोग करने की ख्वाहिश जताई है। हम खुद भी इस बेटी को श्रद्धांजलि देने के लिए एक छात्रवृत्ति योजना तैयार कर रहे हैं इसकी घोषणा शीघ्र की जाएगी।
25 जनवरी को रिजल्ट
संस्थान के सूत्रों का कहना है कि बिटिया के फाइनल ईयर का रिजल्ट भी 25 जनवरी को आना है। पहले दिसंबर में रिजल्ट आना था। लेकिन कुछ कारणों से नहीं आ पाया।