नारायण दत्त तिवारी (एनडी) प्रदेश के अकेले मुख्यमंत्री रहे जिन्होंने अपने शासन के पांच साल पूरे किए। राज्य गठन के समय स्वामी नित्यानंद यूपी विधान परिषद के अध्यक्ष थे। उन्हें अटल बिहारी वाजपेई का करीबी माना जाता था।
राज्य अस्तित्व में आया तो वह मुख्यमंत्री बने, लेकिन कुछ ही समय बाद भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बगावत हो गई तो भाजपा ने यह कुर्सी भगत सिंह कोश्यारी को सौंप दी।
एनडी के शासनकाल को आज भी किया जाता है याद
कुछ माह बाद 2002 फरवरी में हुए चुनाव में कांग्रेस जीत गई और तमाम झंझावतों के बीच नारायण दत्त तिवारी ने पांच साल शासन किया।
आज भी उनके शासनकाल को याद किया जाता है। इसके बाद 2007 में हुए चुनाव में भाजपा सत्ता में आई, लेकिन पहले बीसी खंडूड़ी, फिर रमेश पोखरियाल निशंक और फिर बीसी खंडूड़ी मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद 2012 में जब कांग्रेस को सत्ता मिली तो विजय बहुगुणा सीएम बने, लेकिन कांग्रेस भी भाजपा की राह चली और बहुगुणा को बदलकर हरीश रावत मुख्यमंत्री बनाए गए।